रायपुर, 28 अगस्त 2025
अमृत टुडे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद देश में लगातार कल्याणकारी योजनाओं का सञ्चालन संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत, जिसके माध्यम से गरीब मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में किया जाता है।

यह गंभीर चिंता का विषय है कि यदि इस योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया में रुकावट आ जाएगी, तो गरीब मरीज कैसे अपना उपचार करा पाएंगे। ऐसी समस्याओं को सहन करने की भी एक सीमा होती है, और ऐसा प्रतीत होता है कि इस सीमा के पार जा रहा है।
सरकार के गठन के बाद लगातार इस पृष्ठ को रोका गया है, जबकि विपक्ष ने अपने राजनीतिक दबाव के माध्यम से इसे सुधारने का प्रयास किया है। जब अस्पतालों ने इस मामले में विरोध और धमकी का सहारा लिया, तो अंततः मजबूरी में सरकार को लगभग 300 करोड़ रुपये जारी करने पड़े। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि पूर्व की सरकारें चुनौतियों का सामना कर रही थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देने में विफल रही है।
कांग्रेस सरकार के समय, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना लागू की गई थी, जिसके अंतर्गत रोगियों को 25 लाख रुपये तक की सहायता मुहैया कराई जाती थी। अब सवाल उठता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कितने लोगों को इस प्रकार की सहायता प्राप्त हुई है? इस सरकार की नीतियां केवल उन योजनाओं को समाप्त करने की दिशा में अग्रसर हैं, जो लोगों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्णय और दिशा-निर्देश गलत साबित हो रहे हैं और यह सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त होकर आम जनता को परेशान कर रही है।

