30 नक्सलियों का सामुहिक आत्मसमर्पण…
बस्तर, 28 अगस्त 2025
अमृत टुडे। एक बार फिर छत्तीसगढ़ के बस्तर सांभाग के बीजापुर जिले में सामूहिक नक्सली आत्म समर्पण की एक महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय घटना घटित हुई है। यह आत्म समर्पण छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के क्रम में आयोजित किया गया, जिसे ‘नियद नेल्लानार योजना’ के अंतर्गत संपन्न किया गया। आज, इस विशेष अवसर पर 30 माओवादी नेताओं ने अपने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया, जो एक सकारात्मक कदम है नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में।

यह आत्म समर्पण कार्यवाही विभिन्न सुरक्षा बलों, जिनमें जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), जिला बल, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), कोबरा, और केरिपु बल शामिल हैं, के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ। आत्मसमर्पित माओवादी विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रहे, जो उत्तर बस्तर डिवीजन के अंतर्गत विभिन्न सब-डिविजन, कंपनी, प्लाटून और एरिया कमेटियों का हिस्सा थे। इनमें से कई सदस्य जैसे कि जिला व सैन्य कमेटी सदस्य (डीवीसीएम, पीपीसीएम, एसीएम), पार्टी सदस्य, पीएलजीए सदस्य, सीएनएम सदस्य, जनताना सरकार के सदस्य और मिलिशिया सदस्य भी शामिल हैं।

राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के लिए ईनाम की राशि की घोषणा की है, जो 50 हजार से लेकर 8 लाख रुपये तक की सीमा में है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए गए हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक, दंतेवाड़ा रेंज, कमलोचन कश्यप, पुलिस अधीक्षक बीजापुर, डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव, तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस प्रक्रिया को और भी अधिक प्रभावी और गंभीर बना दिया। इस सामूहिक आत्मसमर्पण की घटना न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नई आशा की किरण के रूप में उभर रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और नियद नेल्लानार योजना के तहत, आत्मसमर्पित माओवादी व्यक्तियों को पुनर्वास, रोजगार के अवसर, शिक्षा की सुविधाएं, तथा आर्थिक सहायता जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इन उपायों का उद्देश्य न केवल माओवादियों के सामाजिक पुनर्निर्माण में सहायक होना है, बल्कि उन्हें एक उत्पादक और समृद्ध जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। इस संबंध में, बीजापुर के पुलिस अधीक्षक ने माओवादी संगठनों से एक अपील की है कि वे शासन द्वारा निर्धारित नीति का लाभ उठाकर एक शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की ओर लौटने का निर्णय लें। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि वे भ्रामक और विभाजनकारी विचारधाराओं को त्यागें और समाज में अपने योगदान के माध्यम से एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।

