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मितानिन जयंती मंडल हत्याकांड: तीन महीने बाद भी आरोपी फरार ,बंग समाज और कांग्रेसीयों खोला मोर्चा…..

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पखांजूर,13 सितम्बर 2025

अमृत टुडे। पखांजूर क्षेत्र को झकझोर देने वाले जयंती मंडल हत्याकांड को पूरे तीन महीने बीत चुके हैं, और यह अत्यंत चिंताजनक है कि अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की ठोस और स्पष्ट कार्यवाही नहीं की गई है। जयंती मंडल, जो एक कुशल और समर्पित मितानिन कार्यकर्ता थीं, दुर्गाकोंडल क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही थीं और उनकी असामयिक और नृशंस हत्या ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।

यह अत्यंत दुखदाई तथ्य है कि 18 जून 2025 को दुर्गाकोंडल थाना क्षेत्र के हूलघाट जंगल में उनकी लाश बरामद हुई थी, और यह हत्या इतनी भयानक थी कि उनका सिर भारी पत्थर से कुचल दिया गया था, जो इस वारदात की बर्बरता को दर्शाता है। घटना के बाद से अब तक लगातार तीन महीने बीत जाने के बावजूद, इस सनसनीखेज मामले के आरोपियों का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला है, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।

इसी उदासीनता को लेकर अब जयंती मंडल के परिजनों ने कांकेर एसपी को एक ज्ञापन सौंपी है, जिसमें उन्होंने न्याय की मांग की है। परिजन ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाज के लोग भी प्रशासन से कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। निखिल भारतीय बंग समाज के प्रदेश अध्यक्ष, मनोज मंडल, ने प्रशासन को तीखे और स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज को उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा महिला सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार और प्रशासन के प्रति अब सवाल उठने लगे हैं।

आखिरकार, तीन महीने गुजर जाने के उपरांत जयंती मंडल के कातिल कानून की पकड़ से बाहर क्यों हैं? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढना न केवल जयंती मंडल के प्रति न्याय जुटाना है, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर विश्वास बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।कांग्रेस के नेता राजदीप हालदार द्वारा हाल ही में जारी की गई एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक बड़े धरने के आयोजन के बावजूद भी, देखा गया है कि आरोपित व्यक्ति खुले आम गतिशील हैं और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए, हालदार ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में स्पष्ट रूप से यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी है। महिलाओं की सुरक्षा का यह मुद्दा समाज की नैतिकता और कानून व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है, जिससे नागरिकों का विश्वास कमजोर होता जा रहा है।

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