रायपुर,16 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार प्रमुख, सुशील आनंद शुक्ला ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीरता से deteriorate हो चुकी है। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार पूरी तरीके से नकारात्मक रूप से संवेदनशील साबित हो रही है, जिसके कारण अपराधों की वृद्धि की समस्या उत्पन्न हो रही है। चाहे वह नशे की पार्टियों का आयोजन हो या न्यूड पार्टी का मामला हो, अथवा गंभीर अपराध जैसे हत्याएं, लूटपाट और डकैती के घटनाक्रम, इन सभी समस्याओं के पीछे राज्य सरकार की विफलता प्रमुख कारण है।

उन्होंने बताया कि यह स्पष्ट है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह से विफल हो चुकी है और ऐसे में रेल मंत्री भी इस संदर्भ में पूरी तरह से लाचार साबित हुए हैं। सुशील आनंद शुक्ला के अनुसार, यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि आगे बढ़ने वाले इस प्रकार के आपराधिक घटनाओं में कहीं न कहीं सत्ताधारी दल का संरक्षण मौजूद है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे का अध्ययन समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, जिससे स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

उन्होंने यह भी संकेत किया कि सत्ताधारी दल के वरिष्ठ विधायक, जो अपनी सरकार को बचाने में लगे हुए हैं, वास्तव में एक दार्शनिक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि असली सच्चाई यही है कि इन अपराधों के कई मामलों में सरकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अक्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह सर्वविदित है कि एक सक्षम और जवाबदेह सरकारी तंत्र के बिना, समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत कठिन है।
अब भाजपा नेता भी मानने लगे है राज्य की कानून व्यवस्था समाप्त…
भारतीय जनता पार्टी में संगठन मंत्री की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है, और ये नेता पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र के रूप में कार्य करते हैं। पवन साय, जो कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं, उनकी स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि वे, जो पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं, स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं, तो हम आसानी से सोच सकते हैं कि आम आदमी की सुरक्षा और स्थिति कितनी अधिक चुनौतीपूर्ण होगी।
यह समझने योग्य है कि यदि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में इस तरह की चिंताएं उत्पन्न होती हैं, तो इसका प्रभाव सीधे उस सामान्य जन الحياة पर पड़ेगा, जो प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और कल्याण के लिए उन नेताओं पर निर्भर करता है। अतः, यह एक गंभीर विषय है कि जब राजधानी में पवन साय जैसे नेता, जो अपनी विनम्रता और समर्पण के लिए जाने जाते हैं, असुरक्षित अनुभव करते हैं, तो सामान्य नागरिक की स्थिति और भी चिंतनीय हो जाती है। एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता है, ताकि समझा जा सके कि नागरिकों की भलाई को प्राथमिकता दी जा रही है।
पवन साय पर हमला
एनएचएम कर्मचारियों की मांगें बिल्कुल जायज हैं, और इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता कि वर्तमान सरकार उनके साथ स्पष्ट रूप से अन्याय कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से अपनी नाखुशी व्यक्त करती है और कड़े शब्दों में विरोध करती है कि सरकारी तंत्र एनएचएम कर्मचारियों की उन महत्वपूर्ण मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने के बजाय उन्हें कठोर अल्टीमेटम देकर धमकी दे रहा है कि यदि वे अपनी जगहों पर काम पर लौटने में विफल रहते हैं, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। यह एक अत्यंत निंदनीय स्थिति है, जहां कर्मचारियों को उनकी संवेदनशील समस्याओं के समाधान की तलाश में और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, यह ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें एक गारंटी दी थी, जो कि कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ाने का एक प्रयास था। लेकिन यह सवाल उठता है कि जब आप उस वादे को पूरा करने में सक्षम नहीं थे, तो आपने यह वादा क्यों किया था? इस प्रश्न का उत्तर तलाशना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भविष्य में कर्मचारियों और सरकार के बीच विश्वास की बहाली का मार्ग प्रशस्त होगा।
आपके द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में अपने एनएचएम कर्मचारियों से किए गए वादों को लेकर हमने देखा है कि आपने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों को माना जाएगा और उन्हें नियमित किया जाएगा। यह वादा केवल चुनावी घोषणाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आपको इसे कार्यान्वित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। ऐसा क्यों हो रहा है कि आप अपने वादों से मुकरते नजर आ रहे हैं? इसके अतिरिक्त, यह भी ध्यान देने योग्य है कि केंद्रीय सरकार ने स्पष्ट रूप से यह घोषणा की है कि एनएचएम कर्मचारियों को नियमित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। यह एक राज्य का विषय है, और ऐसे में यह देखना आवश्यक है कि अंतिम निर्णय क्यों अधर में लटका हुआ है।
यदि इस प्रक्रिया में कोई अवरोध है, तो उसे हल करना चाहिए ताकि कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया जा सके। असल में, डबल इंजन की सरकार एनएचएम कर्मचारियों के साथ भ्रम पैदा करने और उन्हें धोखा देने का कार्य कर रही है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यदि किसी भी एनएचएम कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से प्रताड़ित या परेशान किया जाता है, तो हमारी कांग्रेस पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि हम सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करें। हमें एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे कर्मचारियों को उनके अधिकार और सम्मान मिले।
कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति अजय चंद्राकर के बयान पर…..
प्रदेश में अपराध की स्थिति अत्यंत चिंताजनक स्तर तक बढ़ गई है, जिससे समाज में असुरक्षा की भावना व्यापक रूप से फैली हुई है। अपराधी दिन-प्रतिदिन अपने कार्यों में अधिक निर्भीक हो गए हैं, जिससे कानून व्यवस्था लगभग समाप्ति की ओर अग्रसर प्रतीत हो रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस गंभीर मुद्दे को लगातार अपने एजेंडे में रखा है और इस पर ध्यान आकर्षित करने के लिए समय-समय पर आंदोलन भी करते रहे हैं।
यह विषय अब इतना महत्वपूर्ण हो चुका है कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इसकी गंभीरता को समझने लगे हैं। अजय चंद्राकर द्वारा व्यक्त की गई चिंता को नाजायज समझते हुए, यह स्पष्ट है कि कोई भी छत्तीसगढ़ में रहने वाला राजनेता यह बात स्वीकार नहीं कर सकता कि हमारे प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बात करते हुए, यह महसूस किया जा रहा है कि उन्हें असुरक्षित स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, और पुरुष भी हिंसा का शिकार बन रहे हैं।
यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब मादक पदार्थों के सेवन को लेकर आयोजित होने वाली पार्टियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है, और विशेष रूप से इस संदर्भ में विदेशी ड्रग्स का छत्तीसगढ़ में प्रवेश किसी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। जहां पहले बात मादक पदार्थों तक सीमित थी, वहीं अब न्यूड पार्टियों का आयोजन भी हो रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी अब नशे का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है।
अंत में, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि गृहमंत्री इस संबंध में पूरी तरीके से लापरवाह प्रतीत हो रहे हैं। उनकी निष्क्रियता और अनदेखी से प्रदेश की जनता में बड़ा असंतोष और चिंता व्याप्त हो गई है, जो निश्चित रूप से समाज के सभी तबकों के लिए चिन्ता का विषय है।

