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विश्वविद्यालय की लापरवाही के खिलाफ NSUI का प्रदर्शन, छात्र निर्णयों पर उठाए सवाल….

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NSUI का अनोखा विरोध: कुलपति–कुलसचिव को सिखाई ‘ABCD’,किया नुक्कड़ नाटक,….

छात्र-विरोधी नीतियों पर NSUI का निशाना,’ABCD’ के जरिए जताया विरोध,…..

अमृत टुडे रायपुर…पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में लगातार हो रही लापरवाहियों और छात्र-विरोधी निर्णयों के विरोध में आज नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने प्रशासनिक भवन के सामने एक नुक्कड़ नाटक और प्रतीकात्मक प्रदर्शन का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व वाइस चेयरमैन पुनेश्वर लहरे ने किया, जिन्होंने इस घटना के दौरान छात्रों की बातों को उचित मंच प्रदान किया।

NSUI के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए ABCD के अक्षर लेकर आए, और उन्होंने कुलपति और कुलसचिव को प्रतीकात्मक रूप से ABCD और पहाड़ा पढ़ाकर उनकी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान, छात्र नेता पुनेश्वर लहरे ने कहा, “NAAC की जगह NACC छापना केवल एक गलती नहीं मानी जा सकती, बल्कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का स्पष्ट उदाहरण है।” उनका यह भी कहना था कि इतनी गंभीर त्रुटि का पता एक साल बाद चलना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह छात्रों के प्रति एक गंभीर उपेक्षा का संकेत भी दर्शाता है।

इस तरह के विरोध प्रदर्शन छात्रों की आवाज़ को सुनने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए एक आवश्यक कदम है, जो विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाए गए निर्णयों की वैधता और मौलिकता पर सवाल उठाते हैं।

साथ ही, त्रुटि सुधार शुल्क को ₹120 से बढ़ाकर ₹500 करना स्पष्ट रूप से छात्र समुदाय के प्रति एक गंभीर अन्याय है और यह एक सीधा छात्र-विरोधी कदम माना जा सकता है। विशेष रूप से, यह निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों पर एक असहनीय आर्थिक बोझ डालता है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार करना उचित नहीं है। एनएसयूआई (राष्ट्रीय छात्र संघ of इंडिया) की प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:

1. जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही की जाए, ताकि ऐसे निर्णयों के पीछे की कारणों की समीक्षा की जा सके और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

2. सभी छात्रों की अंकसूचियाँ निःशुल्क सही की जाएं और उन्हें जल्द से जल्द वापस लौटाया जाए, जिससे विद्यार्थियों का समय बर्बाद न हो और उनकी शिक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

3. त्रुटि सुधार शुल्क को वापस ₹120 या उससे भी कम करने की व्यवस्था की जाए, ताकि इसे गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की पहुँच में रखा जा सके।

4. दस्तावेज़ छपाई और जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और इस प्रक्रिया की सख्त निगरानी की जाए, ताकि छात्रों को कोई असुविधा का सामना न करना पड़े और उन्हें अपनी स्वच्छ और सही-सही जानकारी प्राप्त हो सके।

इस प्रकार, एनएसयूआई की ये माँगें न केवल छात्रों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाती हैं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और समानता को भी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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