Amrit today/रायपुर ब्रेकिंग —
रायपुर में माओवादी पति-पत्नी को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने इलाज का बहाना बनाकर शहर में किराए का मकान लिया था। यह गिरफ्तारी डीडी नगर थाना क्षेत्र के चंगोराभाठा इलाके से की गई, जहाँ से आरोपी को पुलिस ने सफलतापूर्वक दबोच लिया। दोनों आरोपी कई वर्षों से रायपुर में सक्रिय थे और उनकी पहचान बीजापुर के गंगालूर इलाके से संबंधित होने के रूप में की गई है।
पति का नाम जग्गू, जिसे आमतौर पर रमेश कुरसम के नाम से जाना जाता है, की उम्र 28 वर्ष है, जबकि पत्नी कमला की उम्र 27 वर्ष है।
रमेश कुरसम,
जो कि अब तक अधिकारियों के घर में गार्ड-ड्राइवर की भूमिका निभा चुका है, ने मकान मालिक को एक फर्जी आधार कार्ड सौंपा था, जो कि पुलिस को गिरफ्तारी के दौरान एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में प्राप्त हुआ। पुलिस ने इस मामले में मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी बरामद किया है, जो कि जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

वर्तमान में,
रमेश पुलिस की रिमांड पर है, जबकि उसकी पत्नी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। पुलिस अब इस मामले में शहरी नेटवर्क की पूरी कड़ी को खंगालने का प्रयास कर रही है, ताकि उन लोगों की पहचान की जा सके, जो इस अवैध गतिविधि में संलिप्त हो सकते हैं। यह पूरी घटना न केवल उसके प्रभावों को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि पुलिस प्रशासन इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
राजधानी में एक महिला सहित दो नक्सलियों के पकड़े जाने के बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। इस घटना ने राजधानी पुलिस की पुलिसिंग प्रणाली के संबंध में कई सवाल उठाए हैं, जिससे नागरिकों के बीच चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली अब जंगलों से भागकर राजधानी के भीतर नाम बदलकर सुरक्षित निवास की तलाश में हैं, जहाँ वे किराए के मकान लेकर रह रहे हैं।
इस संदर्भ में,
किरायेदारों की जानकारी पुलिस थाने में देने के संबंध में जारी आदेश की वास्तविकता को लेकर हालिया घटनाक्रम ने एक नई बहस को जन्म दिया है। डीडी नगर क्षेत्र में जग्गू और कमला नामक दो नक्सलियों की गिरफ्तारी से यह भी स्पष्ट होता है कि थाना पुलिस सहित उच्च अधिकारियों को इस गिरफ्तारी की जानकारी उपलब्ध नहीं थी, जिससे उनके कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञ अनुसंधान एजेंसी (SIA) ने इन दोनों नक्सलियों को गिरफ्तार किया है, जो कि न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चुनौती है, बल्कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता पर भी प्रकाश डालता है।
इस घटना के चलते,
यह आवश्यक है कि पुलिसिंग प्रणाली में सुधार लाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
जानकारी रायपुर पुलिस द्वारा प्राप्त हुई।
मुखबिर से प्राप्त सूचना के आथार पर रायपुर पुलिस द्वारा चंगोराभाठा से दिनांक 24.09.2025 को
एक संदिग्ध महिला एवं पुरूष को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ करने पर अपना नाम जग्गू कुरसम उर्फ रवि उफे रमेश पिता सुक्कू राम कुरसम, उम्र 28 वर्ष निवासी ग्राम सावनार, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर (छ.ग.)एवं कमला कुरसम पति जग्गू कुरसम, उम्र 27 वर्ष निवासी ग्राम सावनार, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर (छ.ग) बताया। इनके द्वारा स्वीकार किया गया कि माओवादी संगठन के लिए काम करते हैं। अभी कुछ समय से रायपुर में रहकर माओवादियों के लिए रसद, ईलाज, बड़े कॉडर आश्रय स्थल इत्यादि तथा शहर में रहकर शहरी नेटवक्क बनाने का काम कर रहे थे। जिस पर उक्त आरोपियों के विस्ूद्ध दीनदयाल नगर, रायपुर में अपराध क. 441/2025 धारा 147, 148, 61 भारतीय न्याय संहिता, 17, 18, 19, 20, 38, 39, 40 विधि विसद्ध कियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 पंजीवद्ध किया गया है। इनके कब्जे 02 नग स्कीन टच मोबाईल, 10 तोला का सोने का बिस्कुट, 1 लाख 14 हजार दो सौ 40 रू. नगद एवं अन्य सामान बरामद किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी कर मान. विशेष न्यायालय (एन. आई.ए.) बिलासपुर में पेश किया गया।
पुलिस मुख्यालय के आदेश पर अग्रिम विवेचना के लिए राज्य अन्वेषण अभिकरण( एस. आई. ए.) को
स्थानान्तरित किया गया है। प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।

