*पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि….*
Amrit today /raipur, chhattisgarh.
*“2004 से ‘छः माह में खत्म’ का वादा, अभी तक नीति नहीं — अब पूछा जा रहा है: नक्सली क्यों नहीं छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं?”*
अरे भाई, कृपया एक महत्वपूर्ण चीज बताओ। जब रमन सिंह मुख्यमंत्री थे, तब ननकी राम कंवर गृहमंत्री थे। उनका एक बयान उठाकर देख लो जिसमें उन्होंने कहा था कि हम 6 महीने में नक्सलवाद का समाधान कर देंगे। यह बात 2004 की है, और तब से वे इसी दावे को बार-बार दोहरा रहे हैं। अब, मैं विष्णु देव साय से यह पूछना चाहता हूं कि आपने वास्तव में ऐसी कौन सी नीति अपनाई है, जो नक्सलवाद की समस्या को सुलझाने में सहायक हो? क्या आपके पास कोई ठोस नीति या कार्यक्रम है जो इस मुद्दे को लेकर प्रभावी हो?
मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि यहां के नक्सली क्यों महाराष्ट्र में जाकर सिलेंडर करते हैं अथवा तेलंगाना या आंध्र प्रदेश में ऐसी गतिविधियाँ करते हैं? आपके क्षेत्र में ये गतिविधियाँ क्यों नहीं होती हैं? यदि आपकी कोई नीति उत्कृष्ट है और सही दिशा में काम कर रही है, तो फिर यह बताएं कि आखिरकार वहां, अन्य राज्यों में, ये सिलेंडर की गतिविधियाँ क्यों हो रही हैं? क्या आपके पास इस प्रश्न का जवाब है?
*“भूमि पत्ते से लेकर बिजली-पंप तक काम अधूरा: आदिवासी जमीन विभाजन-समतलीकरण को सरकार ने क्यों नहीं लागू किया?”*
उसे दिशा में हम लोगों ने जिन कई महत्वपूर्ण कार्यों को संपादित किया है, उनके बारे में विस्तार से बताना आवश्यक है। अब, यह स्थिति बहुत चिंताजनक है; फॉरेस्ट की जमीनों के लिए जो पत्ते दिए गए थे, उनके समतलीकरण के साथ-साथ बिजली और पंप लगाने के लिए हमने समुचित मात्रा में वित्तीय सहायता प्रदान की थी। हाल ही में, एग्रो स्टेज में जो परिवर्तन आया है, उससे हजारों लाखों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। चाहे वह बस्तर हो, सरगुजा, रायगढ़, गरियाबंद या ज्वाला मानपुर, जिन लोगों को पत्ते मिले थे, अब वे सरकार को आवश्यक जानकारी भेजने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें बाहर कर दिया गया है। यदि आप देखेंगे, तो पता चलेगा कि जो आदेश जारी किया गया है, वह उन वंचित लोगों की स्थिति को और भी बदतर बना रहा है।
लघु उद्योगों का पूरी तरह से बंद होना एक गंभीर चिंता का विषय है। पहले, ये उद्योग अनुसूचित क्षेत्र के किसानों से खरीददारी करते थे, और राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ भी उठाते थे, लेकिन अब सारे कार्यक्रम ठप्प हो गए हैं। इसके अलावा, आत्मा नगरी स्कूल भी बंद हो गए हैं, और इससे संबंधित समस्त स्थिति अत्यंत दुष्कर हो गई है। विभिन्न सार्वजनिक योजनाओं का अस्तित्व समाप्त हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप आम जनता को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
आपकी नीतियों के कारण ही हम आज इस स्थिति में पहुंचे हैं, और इसके परिणामस्वरूप हम कमजोर हो गए हैं। अब, आप अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि आबकारी विभाग की स्थिति बहुत चिंताजनक है। रेट, खदानें, और स्कूल, ये सभी सही तरीके से नहीं संभाले जा रहे हैं। समस्या यह है कि आपने इन मामलों को दूसरे के हाथों में सौंप दिया है। इसके परिणामस्वरूप, आबकारी में नकली होलोग्राम और नकली शराब गांवों में बिक रही है। इस सब में, आप क्या कर रहे हैं? ऐसा लगता है कि कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
*”संगठन सृजन के तहत सचिन पायलट और केसी वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक, आगामी सूची जारी करने की प्रक्रिया में तेजी”*
भाई दूज के इस विशेष अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई। आज संगठन सृजन के अंतर्गत, जिन सभी ऑब्जर्वरों ने भाग लिया, उनकी एक महत्वपूर्ण मुलाकात आयोजित की गई। इस बैठक में प्रमुख रूप से वेणु गोपाल और इंचार्ज सचिन पायलट भी उपस्थित थे, जहाँ सभी उपस्थित ऑब्जर्वरों के साथ विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक के बाद एक और महत्वपूर्ण मीटिंग का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हाई कमान के सदस्यों से चर्चा की जाएगी। इसके पश्चात, हमें आशा है कि संबंधित सूची जारी की जाएगी, जिसमें सभी आवश्यक विवरण और निर्देश शामिल होंगे।
*”निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल: राजनीतिक दलों की बैठक की आवश्यकता पर जोर”*
सबसे बड़ी बात यह है कि निर्वाचन आयोग ने अपनी पहचान को खो दिया है, और इस स्थिति को समझने के लिए हमें यह विचार करना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है। एस ए आर कर रहे हैं, तो यहां के जितने राजनीतिक दल हैं, उन सभी को एक बैठक आयोजित करनी चाहिए। यह बैठक किसके लिए की जा रही है? भाई, यह प्रजातंत्र के लिए की जा रही है, यह लोकतंत्र के लिए की जा रही है। लोकतंत्र का वजूद किस पर निर्भर करता है? यह राजनीतिक दलों पर निर्भर करता है। यदि केवल एक ही राजनीतिक दल सत्ता में रहेगा, तो यह चीन जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिसकी जड़ें एक पार्टी शासन में होती हैं।
तो, हमें यह समझना होगा कि निर्वाचन आयोग का कार्य क्या है। यह निर्वाचन की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया था, ताकि लोकतंत्र की नींव को बनाए रखा जा सके। लेकिन वर्तमान में, यह आयोग केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग के रूप में व्यवहार कर रहा है, जिससे इसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। इस प्रकार, सभी राजनीतिक दलों को एकत्रित होकर इस स्थिति पर चर्चा करनी चाहिए, ताकि वे मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार कर सकें, जिसमें लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ सही तरीके से संचालित हो सकें।
