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आदिवासी अस्मिता, अधिकार और सम्मान के लिए उनके संघर्ष ने आज नए भारत की नींव रखी

जगदलपुर, 15 नवंबर 2025

अमृत टुडे । आज जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर हम धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को कोटि‑कोटि प्रणाम करते हैं — उनके त्याग, साहस और जनजातीय अधिकारों के लिए लड़े गए आंदोलन ने आज भी हमें आत्म‑गौरव और प्रेरणा का मार्ग दिखाया है।

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर, हम सभी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को शत-शत नमन करते हैं। उन्होंने जिस अदम्य साहस के साथ आदिवासी अस्मिता, अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया, वह न केवल उस समय के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि आज भी यह आंदोलन हमारे समाज के लिए प्रेरणा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है। उनकी विजन और संघर्ष ने आदिवासी समुदायों के लिए एक नई संभावनाओं की राह खोली है।

आज का नया भारत इसी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए जनजातीय समाज के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रयासों की ओर बढ़ रहा है। यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि हर एक जनजातीय परिवार को विकास के नए एवं ऊँचाइयों को छूने का अवसर मिले और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा सकें। इस माध्यम से हम अपने जनजातीय भाई-बहनों के लिए एक ऐसा समाज बनाने की दिशा में अग्रसर हैं, जहाँ उनकी संस्कृति, पहचान और अधिकारों का सम्मान किया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था, और इस निर्णय के परिणामस्वरूप, प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को यह दिवस विशेष रूप से जनजातियों के योगदान और उनकी सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।

इस अवसर पर,
विभिन्न कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया जाता है, जो जनजातीय समुदायों की समृद्ध संस्कृति, उनके संघर्षों और उनके योगदान को उजागर करते हैं।

आज,
जगदलपुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर जनजातीय लोगों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। इस समारोह में जनजातीय समुदायों के महत्व और उनकी परंपराओं को मनाने के लिए कई विभिन्न गतिविधियाँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और चर्चा सत्र आयोजित किए गए, जो कि यह दर्शाते हैं कि सरकार जनजातीय संस्कृति और उनके विकास को लेकर गंभीर है।

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