• Tue. May 26th, 2026

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की; ८५५५ ग्राम नल जल योजनाएँ पंचायतों को सौंपीं…..

Spread the love

अमृत टुडे, रायपुर, छत्तीसगढ़

24 मई 2026 । उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर जल जीवन मिशन तथा प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने मिशन‑2.0 के अगले दो वर्षों के रोडमैप पर विचार कर शेष कार्यों को शीघ्र और समयबद्ध पूरा कराने के स्पष्ट निर्देश दिए तथा ८५५५ ग्राम नल जल योजनाओं का ग्राम पंचायतों को संचालन‑रखरखाव हेतु सौंपे जाने की जानकारी दी।

विवरण:: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को प्राथमिकता, सक्रियता तथा तीव्रता से पूरा करना आवश्यक है। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव, मिशन संचालक, प्रमुख अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारी वीडियो‑सम्मेलन के माध्यम से जुड़े।

बैठक में मिशन‑2.0 के दो वर्षीय रोडमैप पर सहमति बनी। वर्ष २०२६‑२७ में १३,१८३ योजनाओं तथा वर्ष २०२७‑२८ में ७,३५२ योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही क्रमशः २२ व ४८ समूह जल प्रदाय योजनाओं का कार्य भी पूर्ण किया जाएगा। वर्तमान में ७,०६० गाँव ‘हर घर जल’ रिपोर्ट किए गए हैं, जिनमें ६,०१८ गाँवों का सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। कुल ८,५५५ एकल ग्राम नल जल योजनाओं को पूरा कर संचालन‑रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंप दी गई है।

उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहाँ योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, वहाँ त्वरित सत्यापन कर संचालन‑रखरखाव ग्राम पंचायत को सौंपा जाए। प्रत्येक योजना की प्रगति पर कलेक्टरों के साथ समन्वय कर कड़ी निगरानी रखी जाए। कार्यपालन अभियंताओं के साथ मिलकर समुचित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा कराना सुनिश्चित किया जाएगा। जवाबदेही तय की जाएगी तथा किसी प्रकार की लापरवाही या विलंब पर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

ग्रीष्मकालीन पेयजल आपूर्ति की समीक्षा में निर्देश दिए गए कि खराब हैंडपंपों की तात्कालिक मरम्मत की जाए और जिन हैंडपंपों का पानी जलस्तर के नीचे चला गया है उनमें राइजर पाइप बढ़ाकर आपूर्ति बहाल की जाए। आवश्यकता होने पर नया ट्यूबवेल खोदा जाए। आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखकर जलजनित रोगों के प्रसार से रोकथाम के लिए गंदे पानी की आपूर्ति रोकी जाए, नालियों के मार्ग से गुजरने वाली पाइपलाइनों का नवीनीकरण किया जाए तथा जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
सतत जल उपलब्धता के लिए जनता में वर्षा जल संचयन, जलस्रोत संरक्षण‑संवर्द्धन तथा वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

नक्सल प्रभावित और दुर्गम वनांचलों में भी स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुँचाने को प्राथमिकता दी जाएगी।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति ३०,६२४ एकल‑फेज पावर पम्प, १५,६१६ सौर ऊर्जा संचालित पम्प तथा ९,३८५ नल जल योजनाओं के माध्यम से की जा रही है। ग्रीष्मकाल की तैयारियों के तहत १९,८०७ खराब हैंडपम्पों की मरम्मत की गई; हैंडपम्पों के राइजर पाइपों में कुल ३१,६६४ मीटर पाइप बदले गए तथा २०,७८८ मीटर पाइप बढ़ाए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने पुनः अनुरोध किया कि विभाग समयसीमा, गुणवत्ता और जवाबदेही का सख्ती से पालन करे तथा जनहित में निर्बाध स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएँ।

Leave a Reply

You Missed