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अमृत टुडे, सरगुजा छत्तीसगढ़

26 जून 2026 । कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने हरित खाद—ढैंचा, सनई व मूंग के खेत में पलटने से मिट्टी में नाइट्रोजन व जैविक कार्बन बढ़ने, जलधारण क्षमता व सूक्ष्मजीव सक्रियता में सुधार होने तथा रासायनिक उर्वरक की जरूरत घटने के वैज्ञानिक लाभ बताए।

विवरण :: कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में किसानें हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) की प्रकृति तथा उपयोग विधि से अवगत कराए गए। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ढैंचा, सनई व मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40–45 दिन की अवस्था में खेत में पलटने पर राइजोबियम जीवाणुओं के माध्यम से वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकृत होकर लगभग 50–55 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर उपलब्ध कराते हैं।

इससे मिट्टी में जैविक कार्बन व नाइट्रोजन बढ़ते हैं, मिट्टी की संरचना मजबूत होती है तथा जल धारण क्षमता सुधरती है। लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता से फसल उपज में सुधार होता है और भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता बनी रहती है। वैज्ञानिकों ने खरीफ बुवाई से पहले हरित खाद अपनाने का आग्रह किया तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान कर प्राकृतिक व टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अनेक वैज्ञानिक व बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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