अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़
रायपुर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रतिनिधिमंडल ने समान नागरिक संहिता समिति से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। समाज ने संहिता के 13 में से 11 बिंदुओं को स्वीकार्य बताया, जबकि लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान को हटाने की मांग की। विवाह, भरण-पोषण और उत्तराधिकार में स्पष्टता की भी मांग रखी गई।
विवरण : छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रतिनिधिमंडल ने समान नागरिक संहिता समिति के प्रदेश कार्यालय में पहुंचकर समिति के सदस्यों से विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, नरेंद्र सिंह हरगोत्रा और स्वर्ण सिंह चावला ने विचार रखे। समाज ने समान नागरिक संहिता के 13 में से 11 बिंदुओं को स्वीकार्य बताया, लेकिन लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान पर कड़ी आपत्ति जताई। सिंघोत्रा ने कहा कि भारतीय पारिवारिक व्यवस्था, सामाजिक मर्यादा और युवाओं के भविष्य को देखते हुए लिव-इन संबंधों को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था उचित नहीं है।
उन्होंने मांग की कि इससे संबंधित प्रावधान को संहिता से हटाया जाए। समाज ने कहा कि जब तक ऐसे संबंध कानूनी रूप से प्रतिबंधित नहीं होते, तब तक शोषण, धोखाधड़ी और प्रताड़ना से बचाव के लिए प्रभावी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विवाह पंजीयन और भरण-पोषण को पहले से प्रचलित व्यवस्था बताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने इन पर आपत्ति नहीं जताई। उत्तराधिकार पर समाज ने कहा कि बिना वसीयत वाली संपत्ति में विवाहित बेटी के हिस्से और स्त्रीधन की स्थिति स्पष्ट की जाए। समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रस्तावित प्रावधान केवल विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारा और लिव-इन संबंधों से जुड़े हैं। सभी समाजों से विचार भेजने का आग्रह किया गया।



