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शीशल कला को बस्तर अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचा रही शोभा बघेल…..

ByPreeti Joshi

Mar 11, 2025 #@AmritToday, #amrittoday, #amrittoday.in, #amrittoday.in छत्तीसगढ़ न्यूज, #BIG NEWSMID, #Breaking, #Breaking news, #cg news, #Chhattisgarh, #chhattisgarh breaking news, #chhattisgarh hindi news, #chhattisgarh latest hindi news, #chhattisgarh latest news, #Chhattisgarh news, #chhattisgarh news in hindi, #chhattisgarh news live today, #chhattisgarh news today, #chhattisgarhi news, #DAY NEWS, #Exclusive, #Hindi News, #HINDICHHATTISGARH, #KA SILSILATODAY'S, #latest news, #News, #NEWSCHHATTISGARH, #NEWSHINDI, #NEWSINDIA, #NEWSKHABRON, #NEWSTODAY'S, #Today breaking news, #today news, #TODAY'S LATEST, #UPDATE, #अभी-अभी, #अमृत टुडे, #आज की ताजा खबर, #आमचो बस्तर बाजार, #इंडिया न्यूज़, #काष्ठ कला, #खबरछत्तीसगढ़, #चित्रकोट महोत्सव, #छत्तीसगढ़ न्यूज़, #छत्तीसगढ़, #जगदलपुर, #टेराकोटा, #न्यूजछत्तीसगढ़, #बस्तर अंचल, #बस्तर मड़ई, #बिहान मड़ई, #बेलमेटल, #लेटेस्ट न्यूजछत्तीसगढ़ न्यूज, #विभिन्न शिल्प कलाओं, #शिल्प महोत्सव, #शीशल कला, #शीशल कला का प्रशिक्षण, #शोभा बघेल, #स्थानीय बाजार, #हिंदीछत्तीसगढ़
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अपनी हुनर की आय से घर-परिवार को किया खुशहाल

जगदलपुर, 11 मार्च 2025

बस्तर अंचल विभिन्न शिल्प कलाओं के लिए प्रसिद्ध है जहां काष्ठ कला, टेराकोटा, बेलमेटल, लौह शिल्प इत्यादि के विख्यात शिल्पकार अपनी अमिट पहचान स्थापित कर चुके हैं। इसी क्रम में बस्तर जिले के विकासखण्ड बस्तर के परचनपाल निवासी शोभा बघेल शीशल कला की हुनर को एक नई दिशा देने में जुटी हुई हैं। शोभा जहां स्वयं शीशल रस्सी से डायनिंग मेट, पी-कोस्टर, नाव, झूमर, गुड़िया, बास्केट, साईड पर्स, झूला, दिवाल इंजिन, लेटर होल्डर आदि कलात्मक वस्तुएं तैयार कर विक्रय कर रही हैं। वहीं विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों को शीशल कला का प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद बना रही हैं।

शोभा अपनी कलात्मक वस्तुओं को शबरी एम्पोरियम सहित बिहान मड़ई, शिल्प महोत्सव, बस्तर मड़ई,  चित्रकोट महोत्सव, स्थानीय बाजार, आमचो बस्तर बाजार, राज्य के आधुनिक मॉल तथा अन्य प्रदेशों के प्रदर्शनी, सरस मेला जैसे आयोजनों में विक्रय कर हर महीने 20 से 25 हजार रुपए आय अर्जित कर रही हैं और अपने घर-परिवार को खुशहाल बना चुकी हैं। अपनी छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण आमदनी के जरिए शोभा ने अपने बेटे भगतसिंह बघेल को ग्रेजुएट तक पढ़ाई करवाया है तो बेटी पिंकी बघेल को बीएससी नर्सिंग की शिक्षा दिलवाई हैं। जिससे पिंकी अब जगदलपुर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में स्टॉफ नर्स की सेवा देकर घर-परिवार की मदद कर रही हैं।


शोभा ने बताया कि वह अपने पति बंशी बघेल के साथ विभिन्न स्थानों में शीशल कला का ट्रेनिंग भी दे रही हैं जिसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्व सहायता समूहों के साथ ही केंद्रीय विद्यालय जगदलपुर, नवोदय विद्यालय जगदलपुर के छात्र-छात्राओं को शीशल कला का प्रशिक्षण प्रदान किया है। वहीं वर्तमान में समीपवर्ती ओड़ीसा राज्य के बलांगीर जिले के नवोदय विद्यालय बेलपाड़ा में शीशल कला का प्रशिक्षण दे रही हैं।

शोभा बताती हैं कि विकासखण्ड बस्तर अंतर्गत ग्राम पंचायत के परचनपाल में एनआरएलएम के तहत फरवरी 2016 में गठित स्व-सहायता समूह से जुड़ी और पूर्व से ही शीशल की कलात्मक सामग्री डायनिंग मेट, नाव, झूमर, गुड़िया, बास्केट, साईड पर्स, झूला, दिवाल इंजिन, लेटर होल्डर आदि शीशल उत्पाद बना रहे हैं। जिसके माध्यम से उनकी आजीविका और आय में वृद्धि कर परिवार का भरण-पोषण अच्छे से कर रहे हैं।

बिहान कार्यक्रम से जुड़ने से उन्हें आजीविका के लिए नई दिशा मिली और स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता के साथ ही तैयार उत्पाद का उचित दाम मिलने लगा, जिससे समूह से जुड़ी महिलाओं के जीवन में भी खुशहाली आयी है। बिहान के माध्यम से रिवालिंग फण्ड सहित सामुदायिक निवेश कोष एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से उक्त शीशल कला उत्पाद से जुड़ी महिलाओं को दो लाख रुपए से अधिक की सहायता उपलब्ध कराई गई है। जिससे वे सभी महिलाएं अपनी शीशल कला को देश-विदेश में पहुंचाने के लिए पूरी तन्मयता से जुटी हुई हैं।

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