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सफलता की कहानी: सुशासन तिहार में धमतरी को मिली कला केन्द्र की सौगात…..

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महापौर रोहरा ने किया ’’धरोहर’’ का शुभारंभ

बच्चे और युवा बनेंगे हुनरमंद, सपनों को मिलेगी ऊंची उड़ान

धमतरी 06 मई 2025

अमृत टुडे। विष्णु देव सरकार का सुशासन तिहार धमतरी के युवाओं और बच्चों के सपनों को ऊंची उड़ान देने की सौगात लाया है। सुशासन तिहार के दौरान मिले दो आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए धमतरी शहर में कला केन्द्र ’’धरोहर’’ शुरू किया गया है। शहर में राम मंदिर के सामने इतवारी बाजार परिसर में कला केन्द्र ’’धरोहर’’ का शुभारंभ कल सादे समारोह में महापौर रामू रोहरा ने किया। इस अवसर पर निगम आयुक्त प्रिया गोयल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और शहरवासी भी मौजूद रहे।amrittoday.in
इस कला केन्द ’’धरोहर’’ में बच्चों और युवाओं को विभिन्न कलाओ में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। यहां बच्चों को न सिर्फ अपनी पसंद की विधा को समझने का मौका मिलेगा, बल्कि वे अपने शौक को भविष्य में कैरियर में बदलने का सपना भी देख सकेंगे। इस केन्द्र में अलग-अलग प्रशिक्षण कक्ष तैयार किए जा रहे हैं, जहां नृत्य, संगीत, रंगमंच, फोटोग्राफी, जुम्बा, योग, ड्रामा, रंगोली, चित्रकला, मेहंदी कला, क्ले आर्ट, बांसुरी, तबला, हारमोनियम, बैन्जो आदि के वादन कलाओं के साथ-साथ कर्सिव राईटिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कला केन्द्र में लोक संगीत, पियानो और गिटार बजाने के तरीके भी सिखाए जाएंगे।amrittoday.in


कला केन्द्र ’’धरोहर’’ का शुभारंभ करते हुए महापौर रोहरा ने कहा कि यह कला केन्द्र न केवल बच्चों के लिए एक प्रशिक्षण स्थल होगा, बल्कि यह उनके सपनों को उड़ान देने वाला केंद्र भी साबित होगा। नगर निगम की यह पहल निश्चित रूप से धमतरी के भविष्य को संवारने में सहायक होगी। महापौर ने केन्द्र के संचालनकर्ता को विशेष बधाई देते हुए कहा कि यह केन्द्र शहर के युवाओं के लिए रचनात्मकता का नया द्वार खोलने वाला है। आने वाले समय में यह केन्द्र स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का कार्य करेगा।
कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय निवासियों ने भी अपनी मांग पूरी होने पर सुशासन तिहार के लिए शासन-प्रशासन की प्रशंसा की। स्थानीय निवासियों ने कहा कि धमतरी में ऐसे कला केन्द्र की शुरूआत एक नए युग के आने का संकेत है। अब यहां पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ गाने, डांस, योगा, फोटाग्राफी जैसी और कई चीजें बच्चे सीखेंगे। इससे पढ़ाई-लिखाई और कला-संस्कृति, खेल-कूद को बराबर महत्व मिलेगा। स्थानीय निवासियों ने कहा कि अपनी संस्कृति-अपनी कला को सीखने से बच्चों और युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे इन विधाओं में आगे अपना भविष्य निर्माण भी करने के लिए प्रेरित होंगे।

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