रायपुर ,29 अगस्त 2025
अमृत टुडे। बिहार में प्रधानमंत्री से संबंधित अभद्र टिप्पणी का मामला अब छत्तीसगढ़ में भी उठता दिखाई दे रहा है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा कांग्रेस भवन के घेराव करने की चर्चा के बीच, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान भी सामने आया है।


बघेल ने इस प्रकार की अभद्र टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकार के आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला व्यक्ति स्वयं बीजेपी का एक नेता है, जो इस बात को दर्शाता है कि पार्टी के भीतर कितनी असामान्यताएँ हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उस व्यक्ति की साझा तस्वीरों का सोशल मीडिया पर प्रसार इस मुद्दे को और भी गंभीर बनाता है। भूपेश बघेल ने इस संपूर्ण प्रकरण को कांग्रेस पार्टी की छवि को धूमिल करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया है, जिससे स्पष्ट होता है कि राजनीति में कैसे ऐसे मुद्दों का उपयोग किया जा रहा है। इस स्थिति पर बघेल की प्रतिक्रिया न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राजनीतिक प्रतिकूलताएँ किस प्रकार व्यक्तिगत और पार्टी की प्रतिष्ठा पर असर डाल सकती हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भगवती बघेल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा की जाने वाली गाली-गलौच किसी भी हालात में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि जिस मंच की चर्चा की जा रही है, वहां किसी भी प्रकार के गठबंधन के नेता, जैसे कि राहुल गांधी या तेजस्वी यादव, उपस्थित नहीं थे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल की खबरों में यह बताया गया है कि एक भाजपा का नेता है, जिसने प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।
इस व्यक्ति की एक तस्वीर, जो विवाद में शामिल है, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ट्विटर पर साझा की गई है। बघेल ने यह भी कहा कि यह व्यक्ति उन षड्यंत्रकर्ताओं में से एक हो सकता है जो नाथूराम गोडसे के विचारों का समर्थन करते हैं। उन्होंने यह संभावना भी व्यक्त की कि शायद यह पूरी स्थिति भी एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा हो सकती है, जिसका उद्देश्य राजनीति में हिंसा और असलियत को तोड़-मरोड़कर पेश करना है। इस प्रकार, बघेल ने अपनी बातों में स्पष्टता के साथ यह संकेत दिया है कि इस प्रकार की राजनीति को सख्ती से नकारा जाना चाहिए।

