रायपुर,08 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। विजय शर्मा को यह गहराई से समझना होगा कि उनकी वर्तमान भूमिका प्रदेश के गृहमंत्री के रूप में है, जबकि वे भारतीय युवा जनता मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं। इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारियों को समझते हुए, उन्हें अपने आचरण को इस स्तर का रखना आवश्यक है जो उनके पद की गरिमा को बनाए रखे। भावावेश में आकर कोई भी आदेश या दिशा-निर्देश देना न केवल अनुचित है, बल्कि यह उनकी स्थिति के प्रति गंभीर अनादर का भी प्रतीक है।

यह स्पष्ट है कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखें। यदि कहीं पर भी कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो उसे सुधारना उनकी जिम्मेदारी है। इस प्रक्रिया के दौरान, किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस का कार्य ऐसा होना चाहिए कि वे निर्दोष व्यक्तियों के साथ न तो गाली-गलौज करें और न ही अपमानजनक भाषा का प्रयोग करें। यह साफ है कि इस प्रकार का व्यवहार न केवल गलत है, बल्कि इसे सख्त तरीके से रोका जाना चाहिए, और इस मामले में उचित कार्रवाई होने की आवश्यकता है।
विजय शर्मा को इस संदर्भ में तुरंत आदेश देने से पहले संबंधित थानेदार को बुलाकर सतर्कता से जानकारी लेनी चाहिए कि वहाँ पर ऐसी स्थिति क्यों बनी है। उन्हें यह समझना चाहिए कि स्थानीय स्तर पर किस प्रकार का विवाद चल रहा है। केवल समस्या को और अधिक बढ़ाना या उसे धार्मिक रंग देना, स्थिति को और अधिक सांप्रदायिक बना देता है, जो कि आपत्तिजनक है और संविधान की रक्षा की शपथ के विपरीत है। कम से कम उन्हें संविधान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए, जो कि उनके पद की एक अनिवार्य मांग है।

