शराबबंदी के मुद्दे को लेकर कहा
रायपुर, 08 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। कांग्रेस पार्टी ने कभी भी गंगाजल के संदर्भ में शराबबंदी का कोई स्पष्ट वादा नहीं किया था, बल्कि उन्होंने धान की खरीदी और कर्ज माफी पर गंगाजल की कसम खाई थी, और यह वादा उन्होंने पूरा भी किया। उनके शासनकाल के दौरान 50 से 20 शराब की दुकानें बंद की गईं, जिसका उद्देश्य समाज में शराब की उपलब्धता को नियंत्रित करना और नशामुक्त वातावरण को बढ़ावा देना था। इसके विपरीत, जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है, तब से 62 से ज्यादा शराब की दुकानें फिर से खोल दी गई हैं, जिन्हें बंद करने का प्रयास कांग्रेस सरकार ने किया था।

यह स्पष्ट है कि कंपोजिट शराब की बिक्री के माध्यम से सरकार ने नशे के कारोबार को डबल कर दिया है, जिससे समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। नकली शराब और नकली होलोग्राम की बिक्री अब गली-गली में हो रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। इस तरह के कारोबार के लिए किसी प्रकार के संरक्षण की आवश्यकता होती है, और बिना किसी समर्थन के यह संभव नहीं है। इसलिए, सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की जनता को जानबूझकर नशे की चपेट में धकेलने का प्रयास किया जा रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है और इसका समाधान अति आवश्यक है।
देखिए,
मैं इस समय एक बार फिर से स्पष्ट रूप से बयान कर रहा हूं कि कांग्रेस ने शराब बंदी को लेकर गंगाजल की शपथ नहीं ली है।
हालांकि,
गंगाजल के साथ शपथ ली गई थी धान खरीदी की प्रक्रिया को समर्थन देने और कर्ज माफी को सुनिश्चित करने के संदर्भ में। यह कर्तव्य हमें निभाने में सफल रहे हैं और इस वादे को पूरा किया है।
विपक्ष में रहते हुए,
कांग्रेस ने शराब बंदी के संबंध में वादा किया था, लेकिन जब कांग्रेस की सरकार थी, तब हमारी सरकार ने लगभग 50 से अधिक शराब की दुकानों को बंद कर दिया था। हम शराब बंदी की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे थे।
हालांकि,
वर्तमान सरकार ने आपके सहयोग से 62 से अधिक नई शराब की दुकानें खोलने की घोषणा की है, जिससे कंपोजिट शराब की बिक्री में वृद्धि हुई है।
इस तरह,
उन्होंने इन दुकानों की संख्या को डबल कर दिया है। इस संदर्भ में यह भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान सरकार के पास राजस्व जुटाने का केवल एक मुख्य साधन बना हुआ है, जिसे उन्होंने एक बड़ा हथियार बना लिया है।
इसके परिणामस्वरूप,
देखा जा रहा है कि आज दूसरे राज्यों से नकली शराब, नकली होलोग्राम, और अन्य अवैध उत्पाद गली-गली बिक रहे हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
इस गंभीर मुद्दे पर विचार करते हुए, एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इस व्यापक समस्या का समाधान कौन करेगा, जब यह स्पष्ट है कि बिना किसी कानूनी रोक-टोक के अन्य राज्यों से अवैध शराब की आपूर्ति हो रही है। यह शराब बिना किसी उचित संरक्षण के, विभिन्न राज्यों में कैसे पहुंच सकती है? इस बात का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि छत्तीसगढ़ के हर गांव, हर गली और मोहल्ले में यह नशे की दवा अवैध तरीके से बिक रही है। इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
आखिरकार,
इस अवैध कारोबार से जो वित्तीय लाभ हो रहा है, उस कमीशन का लाभ किसके पास जा रहा है? क्या यह सब केवल कुछ विशेष लोगों के संरक्षण में चल रहा है?
सरकार को इस मुद्दे पर पहले स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति पेश करनी चाहिए।
हालाँकि,
वास्तविकता यह है कि शराब की खपत इतनी तेजी से बढ़ गई है कि सरकार के पास युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए धन की कमी दिखाई दे रही है। यह स्थिति इस हद तक पहुँच गई है कि सरकार किसानों को उनकी फसलों के लिए आवश्यक सहायता मुहैया कराने, कर्मचारियों को उचित वेतन देने, और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान में सहायता करने के लिए भी सक्षम नहीं है।
इस प्रकार की आर्थिक स्थिति का सीधा नतीजा बेरोजगारी की स्थिति है, जो अब चरम स्तर पर पहुंच चुकी है।
इसके परिणामस्वरूप,
छत्तीसगढ़ की जनता नशे की चपेट में आने के लिए मजबूर हो रही है। यह कहना उचित होगा कि भारतीय जनता पार्टी की नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान इस समस्या को विकराल रूप देने में रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ एक नशे के गढ़ में तब्दील होता जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य में एक बार फिर से धर्मांतरण का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से धर्मांतरण के मामलों के खुलासे हो रहे हैं, जिससे स्थिति में तनाव उत्पन्न हो रहा है।
प्रार्थना सभाओं के नाम पर हो रहे इन धर्मांतरण के मामलों में लगातार विवाद बढ़ते जा रहे हैं। विशेष रूप से बालोद जिले के गुंडरदेही थाना क्षेत्र, जांजगीर-चाम्पा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र और बिलासपुर में विभिन्न स्थानों पर धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे थे, जिसने स्थानीय समुदाय में हंगामा उत्पन्न कर दिया।
धर्मांतरण और ध्रुवीकरण
धर्मांतरण की घटनाएँ देश में वर्तमान सरकार के शासनकाल में रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। इस स्थिति पर कांग्रेस पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि सरकार केवल फोटो खींचने और राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए सक्रिय है, जब कि वास्तविक समस्याओं का समाधान करने में इसकी कोई रुचि नहीं है। इसके अतिरिक्त, बीजेपी पार्टी पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वह समाज को ध्रुवीकृत करने और विविधता के बीच साजिश के हथकंडे अपनाने में लगी हुई है। इस संदर्भ में, सरकार नागरिकों को भड़काने के लिए एक सूक्ष्म और योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है, जिससे समाज में अस्थिरता पैदा हो रही है। कांग्रेस का यह मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतंत्र को कमजोर करने और समाज में विभाजन पैदा करने की दिशा में एक गंभीर खतरा बन रही हैं।
धर्मांतरण के इस ज्वलंत मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पीसीसी के अध्यक्ष दीपक बैज ने आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि यह सभी घटनाएं राज्य सरकार की विफलता को दर्शाती हैं, क्योंकि पूर्व में कांग्रेस पर इसी प्रकार के आरोप लगाए जा रहे थे।
उनका सवाल है कि जब आप सरकार में हैं, तो इन घटनाओं को रोकने में क्या समस्या आ रही है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए सरकार इस तरह के उपायों को अपनाने के लिए मजबूर हो रही है।
उनका मानना है कि यह सब एक पूर्व योजनाबद्ध रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके। दीपक बैज का यह बयान राज्य में रचनात्मक और सकारात्मक राजनीतिक संवाद को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा
क्या मुख्यमंत्री ने पीड़ित कर्मचारी के दृष्टिकोण और उनके अनुभवों को समझने की कोशिश की? वास्तविक न्याय तभी संभव है जब दोनों पक्षों की आवाज़ को सम्मानपूर्वक सुना जाए। यह गौर करने वाली बात है कि कर्मचारी में इतनी हिम्मत है कि उसने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक ऐसा कदम उठाना, जिसमें किसी उच्च पदस्थ अधिकारी पर आरोप लगाना शामिल है, यूं ही नहीं होता; इसके लिए विशेष साहस की आवश्यकता होती है। बिना किसी घटना के इस तरह की हिम्मत का प्रदर्शन निश्चित रूप से असामान्य है, और यह संकेत करता है कि कुछ निहित कारण हो सकते हैं।
हम अभी भी यह मांग कर रहे हैं कि संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए ताकि घटना की स्पष्टता प्राप्त हो सके। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी यह आरोप लगा रही है कि बीजेपी नेताओं के लिए कानून अलग हैं, जबकि आम जनता के लिए अलग। यह असमानता न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाती है और जनता की विश्वास को कमजोर करती है। यदि मामले में उचित कार्रवाई करना संभव नहीं है, तो कम से कम मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की जानी चाहिए।
गलतियाँ होना मानवीय स्वभाव का हिस्सा है, लेकिन गलती करना, मारपीट करना, अपशब्द इस्तेमाल करना, और फिर उसके बाद कांग्रेस पर आरोप लगाना – यह किस प्रकार का न्याय है? यही प्रश्न हमारे समक्ष खड़ा होता है, और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
बाढ़ राहत और पैकेज पर सवाल
अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए आगे आ रहे हैं, और कांग्रेस पार्टी को इससे कोई विशेष आपत्ति नहीं है। लेकिन, इस संदर्भ में, सवाल यह उठता है कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार विशेष राहत पैकेज क्यों नहीं ला रही है? दंतेवाड़ा में तीन बड़े खनन क्षेत्रों की मौजूदगी है, जिनसे करोड़ों रुपए का राजस्व सरकार को प्राप्त हो रहा है। इसके बावजूद, सरकार द्वारा स्थानीय लोगों के आंसू पोंछने की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रयास नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप, जनता असहाय महसूस कर रही है, उनके घर उजड़ चुके हैं, और किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इस परिस्थिति को लेकर सवाल उठा रही है, यह पूछते हुए कि ऐसे समय में, जब वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है, तब राहत प्रदान करने की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
किसान और रोजगार का मुद्दा
पिछले दो वर्षों से विभिन्न मुद्दों पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन यह चिंता का विषय है कि इन बैठकों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। किसानों को यूरिया की उपलब्धता को लेकर गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण उनकी कृषि गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों का आंदोलन भी एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए वादों में विकास और सुधार की बातें तो कहीं सुनने को मिल रही हैं, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या इन वादों पर वास्तविकता में विचार किया जाएगा और क्या उनकी पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, जिससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। एंबुलेंस के ड्राइवर कभी मरीजों की डिलीवरी कराने में व्यस्त होते हैं, तो कभी उन्हें घावों पर टांके लगाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है, जो कि एक अत्यंत शर्मनाक स्थिति का संकेत है।
कांग्रेस द्वारा यह आरोप भी लगाया गया है कि कैबिनेट की बैठकें केवल “चाय और बिस्कुट” तक सीमित रह जाती हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य प्रणाली की स्थिति अत्यंत खराब है, और इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वर्तमान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में पूरी तरह से असफल साबित हुई है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ राज्य के बच्चों का भविष्य वर्तमान में अंधकारमय स्थिति में दिखाई दे रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और समग्र विकास पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सरकार केवल औपचारिकताओं और खानापूर्ति में लगी हुई है, जिससे वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। न तो उचित मात्रा में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं, और न ही आवश्यक कॉपियां, जो कि बच्चों की अध्ययन के लिए अनिवार्य हैं। इसके अतिरिक्त, हजारों शिक्षकों के पद खाली होने के बावजूद सरकार की ओर से नई भर्तियों की कोई स्पष्ट योजना या समय सीमा नहीं बताई गई है।
यह देखते हुए कि सरकार को अपने कार्यभार संभाले हुए दो साल हो गए हैं, यह स्पष्ट है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क के तीन महत्वपूर्ण मोर्चों पर सरकार ने गंभीर रूप से विफलता दिखाई है। राज्य में शिक्षा की स्थिति ऐसी है कि बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इस संदर्भ में, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यहां एक प्रकार का जंगलराज चल रहा है, जिसके कारण जनता की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो रही हैं। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार शीघ्र कार्रवाई करें और शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करके स्थिति को सुधारने का प्रयास करे।

