नक्सल पीड़ित परिवार….
रायपुर,12 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। छत्तीसगढ़ में नक्सल पीड़ित परिवार एक बार फिर से अपनी विभाजनकारी और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोलने की योजना बना रहे हैं। इन परिवारों के सदस्य, जो वर्षों पहले नक्सलवाद की भयंकर त्रासदी का सामना कर चुके हैं, अब अपनी गहरी समस्याओं के समाधान के लिए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का निर्णय ले चुके हैं।

इस ज्ञापन के माध्यम से वे अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं। ज्ञापन देने पहुंचने वाले नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि साल 2004 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाई गई पुनर्वास नीति का लाभ आज तक पूरी तरह से नक्सल पीड़ित परिवारों को नहीं मिल पाया है, जो कि विडंबना का विषय है।

कई परिवारों को सरकारी आवास प्रदान किया गया है, परंतु उन्हें मिलने वाली मुआवजा राशि का वितरण अभी भी अधूरा है। वहीं, कुछ परिवारों को मुआवजा तो उपलब्ध कराया गया है, लेकिन उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई है, जो कि उनकी आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

पीड़ितों का यह आरोप है कि सरकार पुनर्वास नीति के तहत निर्धारित लाभों का सही ढंग से वितरण नहीं कर रही है, जिससे उन्हें और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, नक्सल पीड़ित परिवारों के सदस्य बताते हैं कि वे कई बार स्थानीय मंत्री और राजनीतिक नेताओं से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान मांग चुके हैं और कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। फिर भी, उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जो कि प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट संकेत है।
यह स्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि चिंता और समर्थन के लिए एक सशक्त मंच की आवश्यकता है, ताकि इन पीड़ित परिवारों की आवाज को उचित मान्यता मिले।

