अंतरराष्ट्रीय बांस दिवस के अवसर बच्चों के संग बांस पौधों का रोपण
रायपुर,18 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। आज अंतरराष्ट्रीय बांस दिवस के विशेष अवसर पर, बीबंबू फाउंडेशन ने शासकीय प्राथमिक शाला खपरी, जो कि पहारा विकासखंड के अंतर्गत आती है, में एक महत्वपूर्ण और समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को बांस की उपयोगिता और उसके महत्व के बारे में जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान, बीबंबू फाउंडेशन के संस्थापक मोहन वर्ल्यानी ने उपस्थित विद्यालय के बच्चों को बांस के विभिन्न पहलुओं के बारे में न केवल जानकारी दी, बल्कि उन्होंने बांस के बहुआयामी उपयोगों का विस्तृत वर्णन भी किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि कैसे बांस का उपयोग निर्माण सामग्री से लेकर मूर्तिकला, पारंपरिक शिल्प, और पर्यावरण संरक्षण में किया जा सकता है। इस प्रकार, इस कार्यक्रम ने न केवल बच्चों की जानकारी को बढ़ाया, बल्कि उन्हें बांस के महत्व और इसके संरक्षण के प्रति भी प्रेरित किया।

उन्होंने बताया कि बांस को प्रायः “हरा सोना” कहा जाता है, और इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। यह केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर रोजगार के सृजन का एक सशक्त और प्रभावी साधन भी प्रदान करता है। बांस, जिसे सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले पौधों में से एक माना जाता है, वातावरण से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, जिससे यह न केवल एक नवीकरणीय संसाधन है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके बहुपरकारी उपयोगों के अंतर्गत घर बनाने, विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार करने, हस्तशिल्प निर्मित करने, कागज़ बनाने, वस्त्र उत्पादन में, बायोचार के उत्पादन में, और यहां तक कि औषधीय कार्यों में भी शामिल है। बांस की इन विशेषताओं के कारण, यह एक अत्यंत मूल्यवान सामग्री बन गया है, जिसे न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्व दिया जाता है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है।
बांस रोपण से भूमि का कटाव रुकता है, भूजल स्तर सुरक्षित रहता है और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है। जब हम बांस के पौधे को अपने पर्यावरण में लगाते हैं, तो यह न केवल मिट्टी की स्थिरता को बनाए रखता है, बल्कि प्राकृतिक जल चक्र को भी संतुलित करता है, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होती है। इसके साथ ही, बांस के घने जंगल कई प्रकार के जीव-जंतुओं के लिए आवास प्रदान करते हैं, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में विविधता बढ़ती है।

इस संदर्भ में, बच्चों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि वे बांस को केवल एक साधारण पौधा न समझें, बल्कि इसे अपने भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का आधार मानें। उन्हें बताया गया कि बांस के उपयोग के अनेक लाभ हैं, जैसे कि यह नवीकरणीय संसाधन है, जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है। इसलिए, बच्चों को encouraged किया गया कि वे बांस की खेती के महत्व को समझें और इसके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें ताकि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी और हरेभरे पर्यावरण की दिशा में योगदान दे सकें।

इसके पश्चात विद्यालय प्रांगण में एक बेहद महत्वपूर्ण और सामुदायिक दृष्टिकोण से प्रेरित वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बांस और आम के पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण किया गया। इस विशिष्ट अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य रमेश पाटिल, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया, के साथ-साथ शिक्षकों की एक समर्पित टीम, जिसमें सुरेश देवांगन, देवनती निषाद, प्रकाश देवनानी, और अनिल निषाद शामिल थे, विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल विद्यालय परिसर को हरित और सुन्दर बनाना था, बल्कि विद्यार्थियों में वृक्षारोपण के महत्व और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का विकास करना भी था। इस पहल के जरिए, विद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बढ़ाया है और भविष्य की पीढ़ियों को एक बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए अपने संकल्प को मजबूत किया है।

