बस्तर को लेकर संतोष पांडेय का बड़ा बयान: अब भ्रम फैलाने की राजनीति नहीं चलेगी
बस्तर से नक्सलवाद का सफाया अप्रैल से पहले: सरकार ने बनाई रणनीति
आंतरिक आतंकवाद पर सरकार का वार: बस्तर में शांति स्थापना की पहल
रायपुर , 05अक्टूबर 2025
अमृत टुडे। संतोष पांडेय ने दीपक बैज को स्पष्ट शब्दों में बताया कि,
उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता को भ्रमित करने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार और प्रदेश की विष्णु देव साय की सरकार बस्तर क्षेत्र में विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इन सरकारों का मुख्य उद्देश्य बस्तर में अमन, चैन और शांति स्थापित करना है, जिसके लिए वे एक ठोस योजना और समय सीमा निर्धारित कर चुके हैं। खासतौर पर, छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या, जो आंतरिक आतंकवाद या नक्सलवाद के रूप में सामने आती है, उसे निष्प्रभावित करने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है।

पांडेय ने उल्लेख किया कि,
सरकार का लक्ष्य है कि इस गंभीर समस्या का समाधान अप्रैल से पहले किया जा सके, और इस दिशा में समर्पित प्रयास पूरी तन्मयता के साथ किए जा रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में, जब विकास की संभावनाएं अत्यधिक उज्ज्वल हैं, दीपक बैज का बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनता को भ्रमित करने का प्रयास उचित नहीं है।
आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर केवल एक ही है, और वह उत्तर यह है कि बस्तर के समुचित विकास के लिए जितने भी निर्णय लेने की प्रक्रिया होनी है, वे सभी निर्णय बस्तर के समग्र हित में, बस्तरीहों के कल्याण में, और आदिवासी भाइयों की भलाई में होंगे। यह आवश्यक है कि ऐसे निर्णय उस दिशा में अग्रसर हों, जिसमें क्षेत्र के बुनियादी मुद्दे, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसर, प्राथमिकता के रूप में लिए जाएं। किसी भी विकासात्मक कदम का लक्ष्य यह होना चाहिए कि यह उन समुदायों के लिए फायदेमंद हो, जिन्हें आज तक कांग्रेस, भूपेश बघेल और यूपीए द्वारा पर्याप्त और न्यायपूर्ण अवसर नहीं मिले थे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आगामी निर्णय बस्तर के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए लिए जाएं ताकि आदिवासी समुदाय में स्थायी परिवर्तन लाया जा सके।

आपका मंत्री वर्तमान समय में जेल के भीतर है, और क्या आपको यह जानकारी है कि कवासी लखमा किस विशेष घोटाले के चलते अंदर हैं? कृपया एक बार फिर से इस विषय पर स्पष्टता प्रदान करें।
दारू के व्यापार में भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी के मामले में, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर 508 करोड़ रुपये की प्रोटेक्शन मनी के संबंध में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी सूचना एफआईआर के माध्यम से दी गई है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे की स्थिति यह है कि वह जेल के भीतर है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री खुद जमानत पर बाहर है। इसके अलावा, विभिन्न आईएस अधिकारियों को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी, जिनमें से कुछ को हाल ही में रिहा किया गया है। कार्यवाही की इस श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं को समझना अत्यंत आवश्यक है।
कोल में घोटाला, सट्टा में घोटाला, और अन्य कई घोटालों की सरकार आपने चलाई है। ऐसे गंभीर आरोपों के साथ, जब देश नक्सलवाद के खतरे को समाप्त करने के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है, तो यह अत्यंत आवश्यक है कि कांग्रेस पार्टी हमारे साहसी सिपाहियों, जो कि हमारे प्रहरियों का कार्य करते हैं, और विशेष रूप से हमारे सीआरपीएफ के जवानों की मनोबल को तोड़ने की कोशिश न करे। यह वक्त राष्ट्र की एकता और सुरक्षा को मजबूत करने का है, न कि हतोत्साहित करने वाले बयानों और रणनीतियों के माध्यम से हमारे सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास को कम करने का। हमें सभी राजनीति से ऊपर उठकर, उन लोगों का सम्मान करना चाहिए जो हमारी सुरक्षा की रक्षा करते हैं और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार रहते हैं।
यहाँ पर हेमंत रेड्डी द्वारा प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण विचार का उद्धरण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया है कि कैसे कांग्रेस पार्टी नक्सलवाद की स्थितियों को केवल सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखने का दृष्टिकोण रखती है, और इसे कानून व्यवस्था के मुद्दे के रूप में नहीं मानती। उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित जानकारी का हवाला देते हुए प्रश्न उठाया है कि किस प्रकार से अनेकों सड़कें, पुल, स्कूल, चिकित्सालय, और थाना नष्ट कर दिए गए, और हजारों लोगों की हत्या की गई, जो स्पष्ट रूप से एक गंभीर कानून व्यवस्था का विषय है। क्या ये घटनाएँ केवल सामाजिक मुद्दे के रूप में देखी जा सकती हैं? यह कांग्रेस द्वारा बनाई गई धारणा की गहराई को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब जबकि क्षेत्र में शांति का माहौल स्थापित हो रहा है, यह कांग्रेस को स्वीकार्य नहीं है। उनका विचार है कि यह स्थिति एक सकारात्मक विकास है, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों को यह रास नहीं आ रहा। वे कुछ अतिरिक्त मुद्दों को भी उठाते हैं, विशेषकर आंध्र प्रदेश में अडानी द्वारा 7000 करोड़ रुपये से अधिक के काम को प्राप्त करने के संदर्भ में, और सवाल करते हैं कि ऐसे बड़े व्यवसायी का समर्थन करने वाले कौन थे, जबकि आप सरकार में थे।
इस प्रकार, हेमंत रेड्डी का यह तर्क न केवल राजनीतिक विमर्श को उजागर करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच द्वंद्व और संवाद आवश्यक है ताकि सही नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
मैं केरल की स्थिति और वहां की राजनीति पर चर्चा नहीं करता, न ही मैं उड़ीसा के बारे में कोई विचार व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल के योगदान का भी विशेष उल्लेख नहीं करता। भूपेश बघेल, जो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं, ने विभिन्न तरीकों से अडानी समूह का सहयोग किया है, और यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अडानी की संस्था का स्थापन 1988 में हुआ था।
अडानी समूह का विकास विशेष तौर पर 2000 के दशक में देखने को मिला, जब कांग्रेस पार्टी, जो यूपीए के रूप में जानी जाती है, केंद्र में सत्ता में थी। यह प्रगति कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुई थी, और यह जानकारी आपको अवश्य होनी चाहिए। मैं चाहुंगा कि आप इस मुद्दे को लेकर गलतफहमी में न पड़ें या भ्रमित करने की कोशिश न करें। छत्तीसगढ़ की जनता इतनी सरल नहीं है कि वह किसी भी प्रकार के भ्रम या प्रोपागैंडा में आ जाए, और वे मामले की गहरी समझ रखते हैं।

