“गौ माता को दर्जा देने की जरूरत नहीं, वह पहले से ही हमारे दिलों में हैं”
रायपुर, अमृत टुडे। गौ माता केवल राजमाता का दर्जा नहीं रखती है; वह वास्तव में राष्ट्र माता का भी प्रतीक है। मुझे इस बात का विश्वास है कि गौ माता को विशेष दर्जा देने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन यदि ऐसा किया जाता है तो इसमें कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। हर एक भारतीय, हर एक सनातनी और हर एक हिंदू के हृदय में गौ माता का निवास है। यह हमारे लिए केवल एक माता का स्थान नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र माता का भी गौरव प्राप्त करती है। यदि सरकार और आधिकारिक रूप से गौ माता को राजमाता या राष्ट्र माता का दर्जा प्रदान किया जाता है, तो मैं इस कदम का स्वागत करता हूं।

पंडित धीरेन्द्र शास्त्री का भी मैं धन्यवाद करता हूं, क्योंकि उन्होंने गौ माता के प्रति इस महत्वपूर्ण चिंता को उजागर किया है। यह सच है कि हर हिंदुस्तान, हर हिंदुस्तानी, हर सनातनी और हर हिंदू के दिल में गौ माता का प्रमुख स्थान है, और जब भी एक हिंदू गौ माता को देखता है, तो वह उसे अपनी मां के रूप में देखता है। गौ माता हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास का अभिन्न हिस्सा है, और वह सदियों से, युगों से, हमारे लिए परम श्रद्धा का विषय रही है। हमारे जीवन में गौ माता का स्थान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामूहिक भी है।


