बस्तर-सरगुजा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर स्थापना की प्रक्रिया हो सरल – ओपी चौधरी
“44% वन क्षेत्र वाले छत्तीसगढ़ में स्कैटर्ड पॉपुलेशन को जोड़ने के लिए मोबाइल टावर जरूरी – ओपी चौधरी”
रायपुर,10 अक्टूबर 2025
अमृत टुडे। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित इंडियन मोबाइल कांग्रेस के संदर्भ में कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किया गया था, जिसमें उन्होंने स्वयं उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए, एक महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख किया, जो मोबाइल टावर्स से संबंधित था। उनका सुझाव था कि मोबाइल टावर की स्थापना के लिए जो भी प्रक्रियाएं और मानदंड हैं, उन्हें सरल बनाया जाना चाहिए, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44% क्षेत्र जंगलों से आच्छादित है, जिससे उत्पन्न होने वाले ऑक्सीजन का उपयोग केवल छत्तीसगढ़ के लोग ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत और धरती के अन्य हिस्सों के लोग भी करते हैं। इस प्रकार, जिस प्रदेश ने अपने 44% क्षेत्र को जंगल के रूप में संरक्षित रखा है, वहाँ जनसंख्या घनत्व कम है, और बेतरतीब बिखरे हुए गांव, टोलों और मोहल्लों की उपस्थिति है।
इन बिंदुओं के आधार पर, उन्होंने सूचना दी कि वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत, 250 की आबादी वाले गांवों और 100 की आबादी वाले LWE (लीस्टेड वार लोट) प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रक्रिया से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अधिक मोबाइल टॉवर्स की स्थापना होगी, जो स्थानीय निवासियों को बेहतर संचार सेवाएं प्रदान करेगी। वित्त मंत्री चौधरी ने आशा व्यक्त की कि इस दिशा में उठाए गए कदमों से मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ेगी और इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ के विकास में नई गति मिलेगी।

दूसरा, हमारे छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित नवा रायपुर इतनी तेजी से विकसित हो रहा है कि यह न केवल क्षेत्रीय, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना महत्व साबित कर रहा है। यह स्थान भूकंप के दृष्टिकोण से अत्यधिक सुरक्षित माना जाता है, जो इसे अन्य क्षेत्रों की तुलना में एक बेहतर विकल्प बनाता है। यहाँ पर बिजली की उपलब्धता भी सुचारू और प्रभावी ढंग से उपलब्ध है, जो किसी भी औद्योगिक परियोजना के लिए अनिवार्य है। इसी संदर्भ में, नवा रायपुर में एक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक औद्योगिक नीति के अनुरूप डेटा सेंटर की स्थापना की संभावना काफी अच्छी है।
अतः, मैंने विभिन्न राज्यों को यह सुझाव दिया है कि वे ऐसे स्थानों पर अपने डेटा सेंटर स्थापित करने पर विचार करें, जो भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में नहीं आते। विशेष रूप से हिमालय के क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी राज्य में ऐसे प्रस्तावित केंद्रों की स्थापना की जा सकती है, जहाँ भूकंप का खतरा अपेक्षाकृत कम हो। यह दो महत्वपूर्ण बिंदु हैं, जो इस संदर्भ में सामने रखे गए हैं।

