*नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर हो रही विस्तृत चर्चा*
*महिला-बालिका अपराधों में संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश*
*मुख्यमंत्री ने साइबर क्राइम पर जताई गहरी चिंता, जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश*
*सीएम बोले: साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों पर नजर, जनता को मिले सटीक जानकारी*
*साइबर हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार जरूरी: सीएम*
*रेंज लेवल पर 5 साइबर थाने संचालित, 9 और थानों की जल्द होगी शुरुआत*
*जिलों की परफॉर्मेंस की हो रही व्यापक समीक्षा, तय होगी कार्यशैली की दिशा*
*अपराधों में त्वरित चालान की व्यवस्था पर जोर*
*गृह मंत्री, मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और आईजी-SP-कलेक्टर रहे बैठक में मौजूद*

इस महत्वपूर्ण और द्विदिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन राज्य के मुख्यमंत्री, जो उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की व्यापक समीक्षा कर रहे हैं।

इस बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह सहित रेंज के आईजी, कलेक्टर, एसपी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद हैं।

इस दौरान नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गहन चर्चा की जा रही है। विशेष रूप से, जिलों के विभिन्न प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा की जा रही है ताकि हर जिले में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके। महिला और बालिका से जुड़े आपराधिक मामलों में संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसे मामलों में,
निर्धारित समयावधि के भीतर चालान प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को भी उचित रूप से सुचारू करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने साइबर क्राइम और उससे जुड़े आपराधिक गतिविधियों की भी गहन समीक्षा की। वर्तमान में, साइबर अपराधों के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, इसलिये आम लोगों को सही और सटीक जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा,
अंतर्विभागीय समन्वय के साथ लगातार साइबर जागरूकता अभियान चलाने की विशेष पहल की जानी चाहिए।
साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाना चाहिए ताकि नागरिक बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। ज्ञात रहे कि रेंज स्तर पर वर्तमान में 5 साइबर थाने संचालित हैं, और 9 अतिरिक्त थानों का शीघ्र ही संचालन शुरू किया जाएगा, जिसे कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने, नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के व्यापार पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि समाज में नशे के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके। उन्होंने उल्लेख किया कि नशे का कारोबार न केवल स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याओं का कारण बनता है, बल्कि इससे अन्य गंभीर अपराधों को भी बढ़ावा मिलता है।

इसलिए, इस मुद्दे पर एक मजबूत और प्रभावी अभियान चलाने पर जोर दिया गया है, जिसके अंतर्गत जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से , अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के महत्व पर बल दिया है। इन क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी एक गंभीर समस्या है, और इसलिए इन स्थानों पर सख्त निगरानी तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, उन्होंने पिटएनडीपीएस एक्ट के तहत मामलों में समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है, ताकि न्याय को जल्दी और प्रभावशाली तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।

अंत में, मुख्यमंत्री ने नशाखोरी के खिलाफ एक व्यापक जन जागरूकता मुहिम चलाने का आह्वान किया, जिसमें युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों, सामुदायिक केंद्रों और विभिन्न मंचों के माध्यम से युवाओं को सही जानकारी और सलाह प्रदान करने की आवश्यकता है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से,
कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेष रूप से,
हेलमेट न पहनने, सीट बेल्ट न लगाने और नशे की हालत में वाहन चलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अतिरिक्त,
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया है कि ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित किया जाए, ताकि दुर्घटनाओं के संभावित कारणों की पहचान की जा सके और उन्हें प्रभावी तरीके से दूर किया जा सके।
इस प्रकार के कदम उठाने से न केवल सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि जनता के बीच कानून का भय भी बढ़ेगा, जिससे सड़कें और अधिक सुरक्षित बनाई जा सकेंगी।
कलेक्टर एवं वनमण्डलाधिकारी कॉन्फ्रेंस प्रारंभ हो गया है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान, मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया है, जिसमें वन विभाग की विभिन्न गतिविधियों और कार्यों की व्यापक मूल्यांकन की जा रही है।
बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल के प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव, कलेक्टर, वनमण्डलाधिकारी के साथ-साथ अन्य कई महत्वपूर्ण अधिकारीगण भी उपस्थित हैं।
इन सभी की उपस्थिति इस बैठक के महत्व को दर्शाती है, जिसमें वन संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी तथा आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
कलेक्टर और जिला वन अधिकारी (डी एफ ओ) के बीच हुई हालिया सम्मेलन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि किस प्रकार वन संसाधनों से आजीविका में संलग्न तेंदूपत्ता संग्राहकों को अधिकतम लाभ प्रदान किया जा सके। इस चर्चा के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि तेंदूपत्ता का भुगतान निश्चित रूप से सात से पंद्रह दिनों के भीतर किया जाये ताकि संग्राहकों को उनका वेतन समय पर मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, यह भी निर्णय लिया गया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को भुगतान की जानकारी तत्काल उनके मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से भेजी जायेगी। इससे संग्राहकों को अपने भुगतान की स्थिति के बारे में तुरन्त जानकारी मिलेगी, जो उन्हें अपने वित्तीय नियोजन में सहायता करेगी।
सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह था कि लगभग १५ लाख ६० हजार संग्राहक अब ऑनलाइन माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, जो सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से उनके तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य को और अधिक सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सभी भुगतान को पूरी तरह से बैंक खातों के माध्यम से सुनिश्चित किया जायेगा, ताकि ट्रांजेक्शन की पारदर्शिता बढ़ाई जा सके और अनावश्यक देरी को समाप्त किया जा सके।
अंततः, यह भी प्रस्तावित किया गया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की पूरी प्रक्रिया को कंप्यूटरीकृत करने की दिशा में पहल की जाये, ताकि सभी कार्यप्रणालियाँ अधिक प्रभावी और सटीक तरीके से संचालित हो सकें, जिससे संग्राहकों को उनके कार्य में और भी सहूलियत हो।
बीजापुर, सुकमा, और नारायणपुर जिलों में पिछले सीजन के दौरान तेंदूपत्ता के संग्रहण की प्रक्रिया से संबंधित संपूर्ण जानकारी एकत्रित की गई। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों को आगामी सीजन के लिए एक अद्यतन और प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, ताकि संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक सुचारू रूप से संचालित किया जा सके और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सके। यह योजना सभी संबंधित पक्षों के सहयोग और समर्पण की अपेक्षा करती है, जिससे की आगामी तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न किया जा सके।
1.लधु वनोपजों को वनाचलों में आजीविका :लधु वनोपजों को वनाचलों में आजीविका का महत्वपूर्ण साधन के रूप में विकसित किया जाय
यह आवश्यक है कि लधु वनोपजों को वनाचलों में एक महत्वपूर्ण आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जाए, जिससे न केवल स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायता मिले। ग्रामीण जनसंख्या को शिक्षित किया जाए ताकि वे वन संपदा के रक्षकों के रूप में काम कर सकें और अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करके sustainable प्रथाओं को अपनाएं।
2. लधु वनोपज पर आधारित स्टार्टअप्स :
लधु वनोपज पर आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जाना चाहिए, जिसमें निवेश और संसाधनों की व्यवस्था की जा सकती है। इसके तहत, व्यापक बाजार अनुसंधान, तकनीकी सहायता, और व्यापारिक नेटवर्क का निर्माण करते हुए उद्यमिता के विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि युवा उद्यमी इस क्षेत्र में आगे आ सकें और रोजगार सृजन कर सकें।
3. वन धन केन्द्रों को मजबूत करें :
वन धन केन्द्रों को मजबूती प्रदान करने के लिए एक सुव्यवस्थित संरचना विकसित की जानी चाहिए, जिसमें संसाधनों का प्रबंधन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, और स्थानीय उत्पादकताओं के लिए विपणन रणनीतियों का समावेश हो। यह सुनिश्चित करना होगा कि ये केन्द्र स्थानीय स्तर पर ज्यादा प्रभावी तरीके से कार्यरत हों और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण में योगदान दें।
4. छतीसगढ़ हर्बल और संजीवनी के उत्पादों को प्रमोट करें :
छतीसगढ़ राज्य में उपलब्ध हर्बल और संजीवनी उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जानी चाहिए। इस रणनीति में उत्पादों की गुणवत्ता, उनके स्वास्थ्य संबंधी लाभ, और पारंपरिक उपयोग के तरीकों को उजागर करने के लिए सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन शामिल हो सकता है।
5. ग्रामीण-शहरी इलाकों में इन उत्पादों को अधिक से अधिक विक्री का प्रयास करे ताकि इसका मार्केट विकसित हो :
ग्रामीण और शहरी इलाकों में इन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी विपणन योजनाएँ बनाई जानी चाहिए, जिसमें स्थानीय मेलों, बाजारों, और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का समावेश हो। यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़े और वे इन उत्पादों को खरीदने में रुचि रखें, ताकि एक स्थायी और विस्तारित बाजार का निर्माण हो सके।
6. उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण तेजी से हो :
उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण तेजी से और प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं के बीच विश्वास बढ़ सके और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल किया जा सके। इसके लिए आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, ताकि उत्पादक जल्दी और आसानी से प्रमाणन प्राप्त कर सकें।


