“छत्तीसगढ़ महतारी के बिना उत्सव: भाजपा द्वारा राज्य-संस्कृति की अनदेखी का संकेत?”
25 साल बाद राज्योत्सव, लेकिन महतारी की झलक नहीं: भाजपा पर उठे सवाल
रायपुर , अमृत टुडे। भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और उसके समृद्ध इतिहास के प्रति एक विरोधाभासी दृष्टिकोण रखती है, जो इस बात से स्पष्ट होता है कि जब हम इस वर्ष अपना 25वां राज्योत्सव मनाने जा रहे हैं, तब विभिन्न सरकारी विज्ञापनों, होर्डिंगों, पोस्टरों और मंचों पर से छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति गायब है। यह स्थिति न केवल चिंता का विषय है, बल्कि यह भारतीय जनता पार्टी की मानसिकता और उसकी प्राथमिकताओं को भी दर्शाती है।
छत्तीसगढ़ राज्य की 25वीं वर्षगांठ के इस महत्वपूर्ण अवसर पर, जब हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर और विविधता का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तब इस तरह की लापरवाही और सांस्कृतिक प्रतीकों की अनुपस्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी वर्तमान राजनीतिक स्थिति वास्तव में हमारी सामूहिक पहचान, संस्कृति और राज्य की गरिमा का सम्मान करती है? इस प्रकार की कार्यवाही न केवल हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति एक असम्मानजनक संकेत है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनता के लिए भी एक गहरी निराशा का कारण बनती है, जो अपनी परंपरा और इतिहास को संजोने का प्रयास कर रही है।
छत्तीसगढ़ का राजहित, जोकि राज्य की संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, का उचित और प्रभावी तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा है। यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक कमी का संकेत नहीं देती, बल्कि यह भारतीय जनता पार्टी की उस मानसिकता को भी उजागर करती है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और विरासत के प्रति अनदेखी और असम्मान का भाव रखती है। इसके चलते, कांग्रेस पार्टी ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए, राज्य के लोगों की सांस्कृतिक पहचान को माने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि हर स्थान, जैसे कि सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों, और अन्य प्रमुख मंचों पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि यह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और धरोहर के प्रति समर्पण की भावना को भी प्रकट करे। इसके अलावा, यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया जाए।




