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*धमतरी में किसानों ने स्टेट हाईवे जाम कर जताया रोष — दो विधायकों ने समर्थन में दिया साथ*

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*वन-वर्गीकरण व पंजीयन की मांगों को लेकर चक्का जाम; विधायक जनक ध्रुव व अम्बिका मरकाम भी पहुंचे, महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया”*

अमृत टुडे धमतरी छत्तीसगढ़ :: जिले के वनांचल क्षेत्र के कई गाँवों के किसानों ने अपने पांच सूत्रीय मांगों — राजस्व ग्राम में पंजीयन, पुरानी गलत रजिस्ट्रियों की ठीक-ठाक पंजीकरण, नए पट्टों की मांग आदि — को लेकर नगरी मार्ग पर स्थित स्टेट हाईवे को दो घंटे तक जाम कर दिया।

इस प्रदर्शन का समर्थन करने दो विधायक — जनक ध्रुव व अम्बिका मरकाम — खुद मौके पर पहुंचे, तथा प्रदर्शन में शामिल किसानों के साथ solidarity दी।

प्रदर्शन के दौरान महिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रहीं, वहीं पुलिस प्रशासन के अधिकारी शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने हेतु तैनात रहे।

विवरण :: धमतरी जिले के कई गांवों के किसानों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर एक जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें उन्होंने चक्काजाम किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य वन ग्राम और राजस्व ग्राम के पंजीकरण में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाना था। किसानों ने मांग की कि उनका पंजीकरण तत्काल किया जाए और साथ ही साथ उनके लिए टोकन भी जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वन से राजस्व ग्राम में परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाने और ग्राम के किसानों को नवीन पट्टा दिलाने की भी मांग की।

किसान संघर्ष समिति बेलरबाहरा जोन के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों की एक बड़ी संख्या ने धमतरी से नगरी मार्ग पर स्थित स्टेट हाइवे को लगभग दो घंटे तक बाधित रखा।

इस दौरान,
विधायक जनक ध्रुव, जो बिंद्रा नवागढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, और क्षेत्रीय विधायक अम्बिका मरकाम ने इस प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए मौके पर पहुंचकर किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन में महिलाओं की उपस्थिती भी उल्लेखनीय थी, जो मांगों के प्रति अपनी एकजुटता दर्शाने के लिए बड़ी संख्या में शामिल हुईं।

प्रदर्शन के दौरान,
जरूरी सेवाओं जैसे कि एंबुलेंस को निर्वाधता के साथ जाने की अनुमति दी गई, जबकि दोनों तरफ बसों, ट्रकों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। लगभग दो घंटे तक चक्काजाम करने के पश्चात, नगरी एसडीएम प्रीति दुर्गम की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद किसानों ने ज्ञापन सौंपकर चक्काजाम स्थगित करने का निर्णय लिया। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो उन्हें उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

इस दौरान,
सुरक्षा के लिए एएसपी, तहसीलदार, एसडीओपी सहित तीन थाना प्रभारी और अन्य पुलिस बल भी तैनात रहे, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

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