प्रकृति की गोद में रोमांच: रायपुर के निकट मोहरेंगा नेचर सफारी में जिप्सी सफारी और कॉटेज सुविधाओं का शुभारंभ – छत्तीसगढ़ में ईको–पर्यटन को नई डिगारी।….
अमृत टुडे/रायपुर, 23 मार्च 2026 छत्तीसगढ़
रायपुर जिले के खरोरा के निकट स्थित ग्राम मोहरेंगा में “इंदिरा प्रियदर्शिनी नेचर सफारी मोहरेंगा” के लिए नई ईको-पर्यटन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। यह सफारी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तिल्दा–खरोरा मार्ग पर 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं। इसके तहत पर्यटक जिप्सी सफारी, चार सुसज्जित कॉटेज, चार मंजिला वॉच टावर, गार्डन, बच्चों के लिए प्ले एरिया और स्थानीय महिला स्व‑सहायता समूह द्वारा प्रबंधित रेस्टोरेंट जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

प्रकृति, संरक्षण और स्थानीय लाभ
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान इसकी घने जंगलों और जैव विविधता से है। मोहरेंगा नेचर सफारी का उद्देश्य पर्यटन विकास के साथ‑साथ प्राकृतिक संतुलन बनाना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है। इस ईको‑पर्यटन मॉडल से वनों व वन्यजीवों का संरक्षण, पर्यटकों को शिक्षा और स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिप्सी सफारी और वन्यजीव दृश्य
पर्यटक 10 किलोमीटर लंबी जिप्सी सफारी के जरिए चीतल, जंगली सूअर, खरगोश, सियार, लोमड़ी, अजगर जैसे वन्यजीवों के साथ नीलकंठ, कोयल, ईगल सहित 30–40 प्रजाति के पक्षियों को निकट से देख सकते हैं। सफारी के 8 तालाब, एनीकट और चारागाह में सौर ऊर्जा आधारित पंपों से पानी की व्यवस्था की गई है, जबकि लगभग 16 किलोमीटर लंबी चौनलिंक फेंसिंग सुरक्षा के लिए बनाई गई है।
स्थानीय जीवन को बढ़ावा

मोहरेंगा नेचर सफारी साजा, खैर, महुआ, अर्जुन जैसे उपयोगी वृक्षों और सफेद मुसली, सतावर जैसी औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है। “दोहरा तिहरा माता” मंदिर यहां श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आकर्षण है। “जय माँ अंबे महिला स्व‑सहायता समूह” द्वारा रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। यह स्थान छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यटन विकास का एक मिशाल है, जो भविष्य में रायपुर के निकट एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनने की उम्मीद पैदा कर रहा है।




