अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़
02 सितम्बर 2026 । छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल संरक्षण गृहों के नाम बदलने की पहल की है। औपचारिक नामों के स्थान पर अपनत्व और सकारात्मकता से जुड़े नाम रखने की अनुशंसा की गई है। जिलों से 21 सितंबर तक प्रस्तावित नामों की सूची मांगी गई है। इससे बच्चों में आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना विकसित होगी।
विवरण : छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश में संचालित बाल एवं बालिका संरक्षण गृह तथा बाल संप्रेक्षण गृहों की पहचान को अधिक सकारात्मक और बालहितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने इन संस्थाओं के वर्तमान औपचारिक एवं संस्थागत नामों के स्थान पर ऐसे नाम रखने की अनुशंसा की है, जो बच्चों में अपनत्व, आत्मसम्मान, सुरक्षा और सकारात्मक सोच की भावना विकसित करें। डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है।
आयोग ने जम्मू में बाल संरक्षण संस्थाओं के लिए प्रचलित पलाश और परिषा जैसे सकारात्मक एवं गरिमापूर्ण नामों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ में भी इसी प्रकार के नाम अपनाने की अनुशंसा की है। अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने जिलों में नामकरण के दौरान स्थानीय भाषा, संस्कृति, प्रकृति, लोक परंपरा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े सकारात्मक एवं प्रेरणादायक नामों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है। आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि नए नाम तय करते समय संबंधित संस्थाओं में रहने वाले बच्चों, देखरेखकर्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएं। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर जिलों से बाल संरक्षण संस्थाओं के प्रस्तावित नामों की सूची प्राप्त करने तथा इस संबंध में की गई कार्रवाई से आयोग को 21 सितंबर तक लिखित रूप से अवगत कराने का आग्रह किया है।




