अमृत टुडे,धमतरी छत्तीसगढ़
02 सितंबर 2026। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम घुमा, दर्रा निवासी स्वर्गीय लीलाराम साहू द्वारा वर्षों से संरक्षित पारंपरिक एवं विशिष्ट बैंगन किस्म ‘निरंजन भाटा’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उनके उल्लेखनीय योगदान का आज सम्मान किया गया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्टर कार्यालय में स्वर्गीय लीलाराम साहू के पुत्र अजय शंकर साहू को उनके पिता के कृषि क्षेत्र में योगदान, पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण तथा स्थानीय जैव-विविधता को सहेजने के लिए सम्मानित किया।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस अवसर पर स्वर्गीय लीलाराम साहू के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक फसल किस्में केवल कृषि की विरासत नहीं, बल्कि किसानों के पीढ़ियों से संचित ज्ञान, अनुभव और स्थानीय जैव-विविधता की अमूल्य धरोहर हैं। ‘निरंजन भाटा’ जैसी स्थानीय किस्म का संरक्षण और उसका राष्ट्रीय स्तर पर पंजीयन धमतरी जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने स्वर्गीय लीलाराम साहू के परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके प्रयास जिले के अन्य किसानों को भी अपनी पारंपरिक फसल किस्मों के संरक्षण, संवर्धन और पंजीयन के लिए प्रेरित करेंगे।

विशिष्ट गुणों वाली पारंपरिक बैंगन किस्म है ‘निरंजन भाटा’
स्वर्गीय लीलाराम साहू ने लंबे समय तक पारंपरिक रूप से ‘निरंजन भाटा’ बैंगन किस्म का संरक्षण किया। यह किस्म अपने विशिष्ट गुणों के कारण अलग पहचान रखती है। इसके फल लंबे, मुलायम, मीठे गूदे वाले तथा अपेक्षाकृत कम बीज वाले होते हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इसके फलों की औसत लंबाई लगभग 45.8 सेंटीमीटर है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से प्रचलित इस किस्म को संरक्षित रखते हुए स्वर्गीय साहू ने इसे व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए।
PPV&FRA के तहत वर्ष 2024 में हुआ पंजीयन
‘निरंजन भाटा’ जैसी स्थानीय एवं पारंपरिक कृषि किस्मों के संरक्षण तथा कृषक अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा स्वर्गीय लीलाराम साहू को किस्म के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं पंजीयन की प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया गया।
PPV&FRA प्रभारी प्रेमलाल साहू द्वारा पंजीयन से संबंधित प्रक्रियाओं में आवश्यक सहायता, मार्गदर्शन एवं समन्वय किया गया। निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप ‘निरंजन भाटा’ किस्म का वर्ष 2024 में पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के अंतर्गत पंजीयन कराया गया। यह उपलब्धि किसान के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय कृषि जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका है डेढ़ लाख रुपए का सम्मान
‘निरंजन भाटा’ बैंगन किस्म के संरक्षण के लिए स्वर्गीय लीलाराम साहू को 2016-17 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किसान सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। PPV&FRA द्वारा प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र के अनुसार उन्हें 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया था। यह सम्मान 22 अक्टूबर 2019 को प्रदान किया गया।
इसके अलावा ‘निरंजन भाटा’ किस्म में उनके नवाचार एवं पारंपरिक ज्ञान के लिए National Innovation Foundation–India द्वारा आयोजित Ninth National Grassroots Technological Innovations & Traditional Knowledge Awards के अंतर्गत State Award–Chhattisgarh से भी सम्मानित किया गया था। कृषि क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान तथा ‘निरंजन भाटा’ जैसी विशिष्ट पारंपरिक किस्म के संरक्षण के लिए उन्हें ‘छत्तीसगढ़ बेस्ट कृषि उत्पाद’ वर्ष 2022 के सम्मान से भी नवाजा गया था।
पारंपरिक ज्ञान और कृषि जैव-विविधता संरक्षण का प्रेरक उदाहरण
स्वर्गीय लीलाराम साहू की यह उपलब्धि इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक कृषि ज्ञान को उचित तकनीकी सहयोग, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संस्थागत मार्गदर्शन के माध्यम से संरक्षित कर राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। स्थानीय फसल किस्मों का संरक्षण न केवल कृषि जैव-विविधता को सुरक्षित रखने में सहायक है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण आनुवंशिक एवं कृषि संसाधनों को भी संरक्षित करता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी द्वारा किसानों के बीच स्थानीय एवं पारंपरिक फसल किस्मों की पहचान, संरक्षण, पंजीयन तथा कृषक अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। ‘निरंजन भाटा’ का PPV&FRA पंजीयन इस दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
सम्मान समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह तथा सहायक संचालक कृषि मनोज सागर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वर्गीय लीलाराम साहू का योगदान धमतरी जिले की कृषि परंपरा, स्थानीय जैव-विविधता और कृषक ज्ञान की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने वाला है। ‘निरंजन भाटा’ को मिली राष्ट्रीय पहचान उनके वर्षों के समर्पण और संरक्षण प्रयासों की सार्थक परिणति है तथा जिले के किसानों के लिए गौरव और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।




