रायपुर में ट्राईबल एजुकेशन एकीकृत शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय बैठक संपन्न हुई। शिक्षकों ने ट्राईबल और एजुकेशन संवर्ग को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि संविलियन से लगभग 20 हजार शिक्षकों की स्थानांतरण समस्या का समाधान होगा और शासन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
विवरण: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित कलेक्ट्रेट गार्डन में ट्राईबल एजुकेशन एकीकृत शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय बैठक संपन्न हुई। प्रदेश भर से पहुंचे पदाधिकारियों और शिक्षकों ने ट्राईबल तथा एजुकेशन संवर्ग को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई। बैठक के बाद सभी सदस्यों ने “टीई मर्ज करो” के नारे लगाए और अपनी आवाज बुलंद की।

बैठक में संगठन की संरचना को सुदृढ़ करने के लिए प्रांतीय कार्यकारिणी का विस्तार किया गया। कई सक्रिय कार्यकर्ताओं को नए दायित्व सौंपे गए, जबकि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रिक्त अध्यक्ष पदों के लिए नामों का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। संगठन ने कहा कि जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने की तैयारी की जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में लगभग 20 हजार शिक्षक वर्षों से एक ही स्थान पर सेवाएं दे रहे हैं। स्थानांतरण की व्यवस्था न होने से उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ रहा है। संगठन का तर्क है कि दोनों संवर्गों का संचालन व्यावहारिक रूप से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से हो रहा है, इसलिए दोनों को पूर्णतः मर्ज कर एक शिक्षा विभाग बनाया जाए।
संगठन ने दावा किया कि संविलियन से शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। इसके बदले ट्राईबल भत्ता समाप्त होने से राजस्व की बचत होगी। प्रांताध्यक्ष प्रीतम कोशले ने मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की और कहा कि मांग पूरी न होने पर शिक्षकों में आक्रोश बढ़ सकता है।



