कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श
रायपुर,19 जुलाई 2025
अमृत टुडे। राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, रमेन डेका, ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विशेष रूप से अनुरोध किया है कि वे अगले दो महीनों के भीतर एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करें।
इस संदर्भ में, उन्होंने आज राजभवन में कुलपतियों के साथ एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया, जिसमें उन्होंने छात्रों के हित और उनके शैक्षणिक विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस बैठक में राज्यपाल के सचिव, डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, डॉ. एस. भारती दासन, भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवाद का उद्देश्य शैक्षणिक नीति और रणनीतियों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ विश्वविद्यालयों के समग्र शैक्षणिक परिवेश को सुदृढ़ करना है, ताकि छात्रों को व्यापक रूप से लाभ मिल सके।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन्हें उन शैक्षणिक कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से बंद करना चाहिए जिनमें न तो छात्र उपस्थित हैं और न ही शिक्षक. इस निर्णय का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता को बनाए रखना और विविद्याओं की संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना है।
इसके साथ ही, उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को यह भी सुझाव दिया कि वे अपने संसथानों के प्रबंधन के साथ एक बैठक आयोजित करें, जहां वे मिलकर गुणवत्ता सुधार के लिए एक ठोस कार्ययोजना विकसित करें। यह योजना सितम्बर माह के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
साथ ही, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मापदंडों और नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया, ताकि उच्च शैक्षणिक मानकों को सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी प्रकार की असंगति से बचा जा सके।
बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के लिए एक समर्पित पोर्टल का निर्माण किया जाएगा। इस पोर्टल में विश्वविद्यालयों को अपने द्वारा किए गए सभी गतिविधियों, जिनमें प्रवेश प्रक्रियाओं से लेकर अन्य शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों तक शामिल होंगे, को अपलोड करने की व्यवस्था होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे विश्वविद्यालय, जो राष्ट्रीय शैक्षणिक पदोन्नति परिषद (NEC) द्वारा संचालित नेक ग्रेडिंग प्रणाली के लिए पात्र हो चुके हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से ग्रेडिंग की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
इस संदर्भ में, डेका ने यह सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि वे इस नीति के पहलुओं और इसके महत्व को समझ सकें।
इसके अलावा, इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपने विचार साझा किए और सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया।

