रायपुर, अमृत टुडे। छ्तीसगढ़ कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने यह स्पष्ट रूप से कहा कि जिस स्तर पर छत्तीसगढ़ की जल, जंगल और जमीन, साथ ही हमारी बहुमूल्य खनिज सम्पदा, को अडानी जैसे उद्योगपतियों द्वारा लुटा जा रहा है, वह अत्यंत चिंता का विषय है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन व्यक्तियों और संगठनों को, जिनके ऊपर इन प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और रक्षा करने का दायित्व सौंपा गया है, वे इस स्थिति का सामना करने में असफल रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी इस अन्याय में सहभागी बनी हुई है, जो स्थानीय लोगों और पर्यावरण के लिए खतरा साबित हो रहा है। इस संकुचित स्थिति का विरोध करते हुए, कांग्रेस पार्टी ने 22 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक एक आर्थिक नाकाबंदी का आयोजन करने का निर्णय लिया है, जिससे सरकार के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शित किया जा सके।
देश के इतिहास में यह एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण घटना है, जब किसी प्रमुख औद्योगिक घराने और किसी राज्य सरकार के खिलाफ वहां की जनता द्वारा आर्थिक नाकाबंदी का आयोजन किया जा रहा है। यह नाकाबंदी न केवल राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों की ओर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास है, बल्कि यह एक सामूहिक आवाज के रूप में भी उभर रही है, जो निर्धारित करती है कि लोग अपने अधिकारों और स्वायत्तता के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
इस आर्थिक नाकाबंदी में हम विशेष रूप से स्कूल बसों और एम्बुलेंस को पूरी तरह से अलग रख रहे हैं ताकि नागरिकों की आवश्यक सेवाएं बाधित न हों। जैसे ही स्थिति विकट बनती है, हमारी सक्रिय कार्यकर्ता सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे विशेष वाहनों को बिना किसी रुकावट के गुजरने दिया जाए। यह पहल शो करती है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं और जनहित को सर्वोत्तम प्राथमिकता देते हैं।
कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ अडानी के दबाव में जो कार्रवाइयाँ की जा रही हैं, उसके विरोध में यह आर्थिक नाकाबंदी आयोजित की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक नीतियों और राजनीति की यथास्थिति को चुनौती देना कितना आवश्यक हो गया है। प्रदेश के वरिष्ठ नेता विभिन्न क्षेत्रों में इस मुहिम में शामिल होंगे, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों के बीच इस विरोध की भावना को जागृत कर सकें।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज इस आर्थिक नाकाबंदी में सक्रिय भागीदारी करने के लिए रवाना हो चुके हैं, जो इस आंदोलन को और भी सशक्त बनाएंगे। इस प्रकार, आंदोलन का उद्देश्य न केवल आर्थिक दबाव को उत्पन्न करना है, बल्कि यह एक सहयोगी प्रयास भी है जो नागरिकों की आवाज को एकजुटता के साथ आगे लाने का कार्य करता है।
भारतीय जनता पार्टी को ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए था, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लोगों के हितों का नुकसान हो। छत्तीसगढ़ की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा का अधिकार न केवल वर्तमान पीढ़ी का है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार, जो केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रही है, अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी मित्र अदानी को राज्य की सारी खनिज संपदा उपहार में दे रही है। यह कृत्य अत्यधिक चिंताजनक है, क्योंकि कोयला खदानों और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों को अनायास ही उपहार में दिया जा रहा है। इसके साथ ही, हमारे अत्यंत महत्वपूर्ण जंगलों को भी अवैध रूप से काटने की अनुमति दी जा रही है।
इस संदर्भ में, जो वित्तीय नाकेबंदी दो घंटे के लिए की गई थी, वह छत्तीसगढ़ की जनता के समर्पण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल छत्तीसगढ़ की जनता का प्रतिकार है, बल्कि यह उन विरोधाभासों का भी प्रतीक है, जिनका सामना राज्य को तब करना पड़ रहा है जब भारतीय जनता पार्टी अपने निहित स्वार्थों के लिए अदानी के हाथों राज्य की संपदा को लुटा रही है। सभी को एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए तथा इस अन्याय का विरोध करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के हितों का संरक्षण किया जा सके।

