बस्तर, अमृत टुडे । मंत्री नहीं, माँ बनकर मिलीं… बस्तर के नन्हें फूलों से लक्ष्मी राजवाड़े। जब महिला एवं बाल विकास मंत्री, लक्ष्मी राजवाड़े, बस्तर प्रवास पर पहुँचीं, तो उनका उद्देश्य केवल औपचारिकताओं को पूरा करना नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने दौरे के दौरान आँगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण में एक नई दृष्टि को उजागर किया। उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर न सिर्फ उनके हालचाल को जाना, बल्कि इस दौरान उन्होंने बच्चों को “मछली जल की रानी है” जैसी प्यारी और सरल कविता सुनाते हुए उनकी मासूमियत में अपना मन खो दिया।

उनकी सरलता और अनगिनत मातृ वत्सलता ने वहाँ मौजूद सभी लोगों के दिलों को छू लिया, और राज्य के बच्चों के प्रति उनका स्नेह और अपनापन स्पष्ट था। यह केवल एक दौरा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव था जो ममत्व भरे इस मिलन को दर्शाता है, जिसमें लक्ष्मी दीदी ने बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी खुशियों को साझा किया। सच में — लक्ष्मी हैं तो खुशियाँ हैं, और उनका ऐसा सहयोग और प्रेम बच्चों के जीवन में एक नई रोशनी का संचार करता है। यह बच्चों के लिए न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि उनकी विकास यात्रा में एक सकारात्मक दिशा देने वाला भी है।

