रायपुर, 05 सितम्बर 2025
अमृत टुडे। मल्लिकार्जुन खड़गे को यह पूछना चाहिए कि Goods and Services Tax (GST) के संदर्भ में, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफलतापूर्वक लागू किया, उसके पहले हमारे देश में विभिन्न प्रकार के कर संरचनाएं कैसी थीं। उस समय, देश के भीतर विभिन्न राज्यों के पास अपने-अपने करों के अलग-अलग प्रकार होते थे,

इसके अलावा,
केंद्र सरकार के द्वारा भी कई प्रकार के कर लगाए जाते थे। इस तरह के जटिल कर ढांचे के कारण, राज्यों की सीमाओं पर गाड़ियों को अक्सर रोका जाता था, जिससे व्यापार और वाणिज्य के संचालन में बहुत सी कठिनाइयां आती थीं। यह स्थिति न केवल व्यापार को प्रभावित करती थी, बल्कि सामान्य नागरिकों के लिए भी समान्य जीवन जीना कठिन हो जाता था।
इससे देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि रुक जाती थी, और उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता था। ऊपर से कर लगने के कारण वस्तुओं की लागत बढ़ जाती थी, जो अंततः आम जनता और आर्थिक विकास दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ।
लेकिन, मोदी द्वारा किया गया यह महत्वपूर्ण कर सुधार, जिसने हमारी पुरानी कर प्रणाली में व्यापक परिवर्तन लाया, न केवल अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में सहायक रहा है, बल्कि यह महामारी के बाद की स्थिति में भी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित कर रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नजर डालें तो, पूरी दुनिया की अनेक अर्थव्यवस्थाएं अभी भी संघर्ष कर रही हैं, जबकि भारत ने इस सुधार के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया है।
लेकिन जो बड़े रिस्पांस नरेंद्र मोदी लगातार करते रहे हैं, उनके परिणाम स्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में पहचान मिली है और यह एक ऐसा मौक़ा है जो बड़े अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धात्मक रूप से संभव हो पाया है।
अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप लगाने से अर्थव्यवस्था की वास्तविक प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ता है; यह तो एक ऐसा खेल है जो लोग जीवन भर खेलते रहते हैं।
हालांकि, नरेंद्र मोदी ने हमेशा अपनी नीतियों और कार्यों के माध्यम से ऐसी आलोचनाओं का सामना किया है, जो कि केवल भ्रमित करने के उद्देश्य से होती हैं।

