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“छत्तीसगढ़ में पहली बार डीजीपी कॉन्फ्रेंस; PM और गृह मंत्री होंगे शामिल, सरकार ने शहीद परिवारों पर राजनीति करने वालों को घेरा”…..

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“डीजीपी कॉन्फ्रेंस का नक्सलवाद से कोई संबंध नहीं, यह पुलिसिंग के आधुनिकीकरण का मंच है”

रायपुर, 22 नवंबर 2025


अमृत टुडे। छत्तीसगढ़ में 28 से 30 नवंबर तक पहली बार डीजीपी कॉन्फ्रेंस होने जा रही है, जिसमें प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री तीन दिनों तक मौजूद रहेंगे। सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर पुलिसिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण, प्रक्रियाओं में सुधार और नवाचारों को साझा करने का बड़ा मंच है। इसका नक्सलवाद से कोई संबंध नहीं है।

वहीं नक्सली घटनाओं और शहीदों का ज़िक्र करते हुए सरकार ने विरोध करने वालों पर निशाना साधा है और कहा है कि ऐसे लोगों को शहीद परिवारों और नक्सल पीड़ितों से माफी मांगनी चाहिए। सरकार ने मतदाता सूची शुद्धिकरण और धर्मांतरण पर सख्त कानून लाने की तैयारी की भी पुष्टि की है।

28, 29 और 30 नवंबर को छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण डीजीपी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है, जो कि देश के विभिन्न राज्यों में पहले आयोजित हुआ करता था, लेकिन यह पहली बार है कि यह विशेष कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में होने जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री दोनों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है, और वे तीन दिनों तक इस कार्यक्रम में रहेंगे। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें चर्चा होगी कि किस प्रकार देश की पुलिसिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा सकता है।

सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि कैसे विभिन्न प्रक्रियाओं को संशोधित और परिवर्तित कर, कानूनी प्रक्रियाओं को उन्नत किया जा सके ताकि न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस संदर्भ में, हमारे प्रदेश में यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इसकी तैयारी पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी और हमारे प्रदेश के समस्त प्रशासनिक अधिकारी इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं, और मुख्यमंत्री स्वयं इस महत्वपूर्ण आयोजन की समीक्षा कर रहे हैं।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह कमिश्नर प्रणाली केवल नक्सलवाद से जुड़ा विषय नहीं है। नक्सलवाद का विषय एक राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है, जिसके लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं चल रही हैं। यह प्रक्रिया केवल नक्सलियों के लिए ही विशिष्ट नहीं कही जा सकती; बल्कि यह एक व्यापक डीजीपी कॉन्फ्रेंस है, जो हर वर्ष आयोजित होती है। जब से नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई है, तब से इस सम्मेलन का आयोजन औपचारिकता और बल के साथ हो रहा है। यह इसलिए आवश्यक है ताकि देशभर में हो रहे नवाचारों की जानकारी सभी को मिल सके और उन नवाचारों के आधार पर हम अपनी नीतियों में त्वरित उन्नति कर सकें।

इसलिए, इस आयोजन का किसी अन्य मुद्दे से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा, मैं उन लोगों से यह पूछना चाहता हूं कि जब ताड़ में हिटलर के 76 जवानों के संदर्भ में हम चर्चा करते हैं, तो आप उनके परिवार वालों को क्या कहेंगे? क्या आप उन्हें यह कहेंगे कि उनके प्रियजनों का अब इस दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं रहा, और यह केवल एक औसत घटना है? साथ ही, क्या आप हैदराबाद के 8 महीने के जले हुए बच्चे के बारे में भी सोचना चाहेंगे? ऐसी गंभीर घटनाओं पर विचार करना हमारे लिए आवश्यक है।
इस विषय पर गहराई से विचार करना आवश्यक है कि उन बच्चों के साथ ऐसा क्यों किया गया था, और इसके पीछे के कारणों पर सोचने के लिए हमें एक विस्तृत दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन बच्चों को जो शर्मिंदगी महसूस हो रही है, उसकी वैधता को समझने में हमें सभी शहीद परिवारों और नक्सली हिंसा के पीड़ित परिवारों के अनुभवों तथा दर्द को भी ध्यान में रखना चाहिए। क्या हम मणिकांत के बारे में विचार कर सकते हैं, जिसे बम विस्फोट के कारण दुखद रूप से खो दिया गया?

हमें चंगा के हालात पर भी सोचना चाहिए, साथ ही हाथी अगला गांव की स्थिति के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। झेलम में हुई घटनाओं के चलते छत्तीसगढ़ के समस्त नेतृत्व को समेटा गया था, और यह उन सभी घटनाओं का परिणाम है जिनके लिए बार-बार सरकार पुनर्वास की कोशिशें कर रही थी।

इस पर विचार करने के बाद, जिन लोगों ने ऐसे अपशब्द कहे हैं, उन्हें अपने शब्दों पर अपने अधिकार का एहसास करना चाहिए। उन्हें शहीद परिवारों और नक्सल पीड़ित परिवारों से हाथ जोड़कर माफी मांगने का साहस दिखाना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, और इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ को राज उत्सव में समय प्रदान किया, और इसके बाद डीजीपी कॉन्फ्रेंस के लिए भी उनकी उपस्थिति आवश्यक है। इस तरह के सम्मेलनों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदेश के समस्त शासन और प्रशासन को मिलता है, जो कि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है।

इसी प्रकार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गृहमंत्री के आगमन, और विभिन्न नेताओं तथा अधिकारियों की मौजूदगी छत्तीसगढ़ के शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को मजबूती प्रदान करती है। इस सबके माध्यम से समृद्धि और विकास को एक नई दिशा मिलती है, जिससे प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाता है।

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