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“मोदी सरकार की मनरेगा बंदी की साजिश मजदूर विरोधी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रहार”…..

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“छत्तीसगढ़ में मनरेगा पर केंद्र की नई नीति से ग्रामीण रोजगार संकट, 60-40 फंडिंग से पंचायतें प्रभावित”

बस्तर , 10 जनवरी 2026

अमृत टुडे। मोदी सरकार की मनरेगा को कमजोर करने की साजिश की। वक्ता ने इसे मजदूर विरोधी कदम बताया है, जो ग्रामीण परिवारों के 100 दिन के कानूनी रोजगार अधिकार को खतरे में डाल रहा है। बस्तर की पंचायतों तक प्रभावित हो रही हैं।

विवरण :: मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम बदलने और बंद करने की साजिश रची है, जो देश व प्रदेश के लिए मजदूर विरोधी कदम है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली योजना है, जो हर ग्रामीण परिवार के एक वयस्क को 100दिन का कानूनी रोजगार देती है। मजदूर को काम मांगने का अधिकार है, 15 दिन में काम या बेरोजगारी भत्ता मिलना चाहिए, घर से 5 किमी दायरे में तालाब, सड़क, नाली, नहर या कुआं जैसे काम।

लॉक डाउन में इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभाला। यह कोई योजना नहीं, कानूनी गारंटी है, पहले केंद्र 90-100% फंड देता था। अब 60-40 के नए अनुपात से राज्य पर 40% बोझ, जहां पैसा ही नहीं। पहले पंचायतों में करोड़ों के काम होते थे, अब बस्तर की पंचायतें भी ठप।





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