अमृत टुडे, धमतरी छत्तीसगढ़
06 अगस्त 2026 । विकासखंड नगरी के भोथापारा गाँव के दो आदिवासी परिवार ने निजी भूमि पर बनी आजीविका डबरी में विभागीय मार्गदर्शन से वैज्ञानिक मछलीपालन अपनाकर आय बढ़ाई; डबरी के जल से सिंचाई संभव हुई, खेती सशक्त हुई और परिवार आत्मनिर्भर बनकर अब अन्य किसानों को भी मछलीपालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विवरण : धमतरी के विकासखंड नगरी स्थित भोथापारा गांव में निर्मित आजीविका डबरी ने अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राहियों की जीवनशैली बदल दी। वर्षा पर निर्भरता और सीमित सिंचाई के कारण अस्थिर आय वाले परिवारों ने विभागीय तकनीकी सहयोग से डबरी में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज व संतुलित आहार देकर वैज्ञानिक पद्धति से मछलीपालन शुरू किया। नियत अवधि में मछलियों के बिक्री से अपेक्षा से अधिक आय प्राप्त हुई, जिसे बच्चों की शिक्षा, कृषि निवेश और घरेलू आवश्यकताओं में लगाया गया।
डबरी में संचित जल से खेतों की निरंतर सिंचाई संभव हुई जिससे फसल उत्पादकता बढ़ी और खेती की लागत कम हुई। यह बहुउद्देशीय मॉडल ग्रामीण परिवारों को विविध आय स्रोत प्रदान कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह खोल रहा है। भोथापारा के हितग्राहियों का अनुभव यह दर्शाता है कि उचित मार्गदर्शन, कम लागत और जल संसाधन के समुचित उपयोग से मछलीपालन टिकाऊ आजीविका बन सकती है।




