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26 जून को मुख्यमंत्री निवास पर लोकतंत्र सेनानी होंगे सम्मानित…..

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26 जून को मुख्यमंत्री निवास पर लोकतंत्र सेनानी होंगे सम्मानित 500 परिवार शामिल होंगे मुख्यमंत्री निवास में

रायपुर/ अमृत टुडे/ 26 जून 1975 को, जब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल की घोषणा की, तब भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अंधेरा अध्याय शुरू हुआ। इस अवधि के दौरान, न केवल विपक्षी दलों के नेताओं को रोकने के लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, अर्थात् स्वतंत्र मीडिया के अधिकारों को भी गंभीर रूप से कुचला गया। यह आपातकाल, जो 1975 से 1977 के बीच पूरे देश में लागू रहा, ने भारत में जनता की आवाज को दबाने के प्रयासों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। इसके तहत, अनेक लोगों ने अपने विचार व्यक्त करने के लिए संघर्ष किया और उन्हें अक्सर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा।amrittoday.in

इस घटना की स्मृति को जीवित रखने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता को संपोषित करने के इरादे से, लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा एक भव्य आयोजन आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन के विशेष कार्यक्रम में, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपने आधिकारिक निवास पर विभिन्न लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करने का कार्य करेंगे, जो उस कठिन समय में सत्य के प्रति उनके साहस और संघर्ष का प्रतीक है। यह समारोह न केवल उन बहादुर लोगों के प्रति श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम होगा, बल्कि जन जागरूकता बढ़ाने और लोकतंत्र के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारियों पर जोर देने का भी एक अवसर होगा।amrittoday.in

लोकतंत्र सेनानी संघ छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसके माध्यम से इस कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस प्रेस वार्ता का उद्देश्य यह था कि पूरे प्रदेश में विभिन्न मीडिया माध्यमों के द्वारा इस कार्यक्रम से संबंधित जानकारी का प्रचार प्रसार किया जा सके। इस कार्यक्रम के तहत, मुख्यमंत्री निवास में विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें 500 से अधिक परिवारों को सम्मानित किया जाएगा। ये परिवार वे हैं जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान सत्ताधारी सरकार के खिलाफ अपने विचारों और आवाज को बुलंद किया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस सम्मानित समारोह के माध्यम से, समाज में उनके योगदान को मान्यता दी जाएगी और यह दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए साहसिक कदम उठाए।

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