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भारतीय बांग्लाभाषी और बांग्लादेशी है अलग

रायपुर, 05 सितम्बर 2025

अमृत टुडे। अपने स्वयं के राजनैतिक लाभ के लिए, पश्चिम बंगाल के कुछ तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता बार-बार बंग समाज की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है जो किसी भी हालत में छत्तीसगढ़ सर्व बंग समाज को मंजूर नहीं है। इस संदर्भ में, समाज के साथी हर स्तर पर इसके विरोध में सक्रिय होने के लिए तत्पर हैं और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

बंग समाज को छत्तीसगढ़ में सदा-सर्वदा से विशेष सम्मान मिलते आया है। यहाँ पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से बंग समाज के लोग निवास कर रहे हैं, जिनमें आज ऐसे साथी भी शामिल हैं, जिनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी यहाँ जीवन यापन कर रही है। यही नहीं, कमोबेश सम्पूर्ण भारत के हर प्रदेश में बंग समाज को लेकर यही वर्तमान परिदृश्य देखने को मिलता है।

इतिहास में एक ऐसा समय था जब पश्चिम बंगाल में डाक्टरी, इंजीनियरिंग, और कानून के क्षेत्र में उपलब्ध उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर मौजूद थे। इन्हें उस समय के राजाओं और अंग्रेजों द्वारा समाज के सेवा हेतु विभिन्न प्रदेशों में बसाया गया था। इस प्रकार, उनकी मेहनत और संघर्ष ने न केवल समाज को विकास की राह पर अग्रसर किया, बल्कि उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी छाप भी छोड़ी है। इस बहुमूल्य विरासत की रक्षा करना और उसे बढ़ावा देना, आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।

बंग समाज को पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम में किए गए उसके बलिदान के लिए जाना जाता है और जिस बात का गर्व हर बंग समाज के सदस्य को है और ताउम्र रहेगा। स्वामी विवेकानंद, गुरु रबीन्द्रनाथ, नेताजी सुभाष जैसे ना जाने कितने मनीषियों ने बंगाल के भूमि में जन्म लेकर भारत माता की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और हमारे समाज को ना केवल देश में अपितु सम्पूर्ण विश्व में गौरवान्वित किया। रायपुर तो वो भूमि है जिसमे आज भी स्वामी विवेकानंद जी के बितायें हुए अपने जीवनकाल के समय को स्वर्णिम माना जाता है और सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ स्वयं अपने आप को इस बात के लिए धन्य मानती है।

विज्ञान, कला, संगीत, चिकित्सा और साहित्य के क्षेत्र में अपने अनेकों योगदान के लिए पूरे विश्व में पहचान बनाने वाला समाज आज न केवल आतंकित है, बल्कि गहरे आहत भी महसूस कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण महुआ मोइत्रा जैसे कुछ राजनेताओं की ओछी और गैर-जिम्मेदार हरकतें हैं, जो केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ और लाभ के लिए समाज के खिलाफ षड्यंत्र रचने में लिप्त हैं। हाल ही में, जब छत्तीसगढ़ पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन पर सख्त कदम उठाए, तब महुआ मोइत्रा ने पुलिस के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ की। वह इसी पर नहीं रुकीं; उन्होंने इतना दूर जाकर यह भी कह दिया कि उन्हें देश के गृह मंत्री का सर काटकर प्रधानमंत्री के मेज़ पर रखने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।

इस संबंध में, छत्तीसगढ़ सर्व बंग समाज के आह्वान पर भी TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ मान्था थाने में एक FIR दर्ज कराई गई है, ताकि इस प्रकार की गंदी राजनीति का तत्काल प्रभाव से न केवल स्थायी रोकथाम किया जा सके, बल्कि इसे कानून की चौखट में लाकर आरोपी को सज़ा दिलवाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा सकें। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छत्तीसगढ़ सहित अन्य सभी प्रदेशों में बंग समाज के खिलाफ इस तरह की राजनीति के चलते कोई वैमनस्यता न उभरे। इसके साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसे व्यक्तियों को जो ऐसी असामाजिक और गैर-जिम्मेदार गतिविधियों में संलग्न हैं, उचित कानूनी दायरे में लाकर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।

आज, जब हम राजनीतिक परिदृश्य की बात करते हैं, तो यह स्पष्ट है कि कुछ नेता, जो कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े हुए हैं, आज की तारीख में अपने स्वार्थी राजनीतिक लाभ के लिए एक विशेष रणनीति अपना रहे हैं। ये नेता पूरे देश में बांग्लाभाषी और बांग्लादेशी समुदायों के बीच की पहचान, भेद और फ़र्क़ को मिटाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मामले को अपने अनुयायियों के बीच से हटाना है, ताकि वे इस परिदृश्य को अपने लाभ में बदल सकें।

इससे उनकी रणनीतिक प्रस्तावना यह है कि अगर वे बांग्लाभाषियों और बांग्लादेशियों के बीच का भेद मिटा देते हैं, तो वे अपने वोटबैंक की राजनीति को और मजबूत कर सकते हैं। इसके पीछे जो मंशा है, वह यह है कि वे भविष्य में बंगाल की सत्ता में अपनी स्थिति को बनाए रखने और विस्तार करने का प्रयास कर सकें। इसलिए, यह एक बहुत ही सुनियोजित कदम है, जिसमें कुछ नेताओं की दीर्घकालिक राजनीतिक महत्वाकांक्षा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

बांग्लाभाषी और बांग्लादेशी समुदाय के बीच के इस महत्वपूर्ण फ़र्क़ को समाप्त करने की कोशिश में, ये नेता इतने व्यस्त हो गए हैं कि वे यह समझने में असफल हो रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के बाहर भी तीन करोड़ से अधिक बंग समाज के नागरिक वर्षों से शांति और सद्भाव के साथ निवास कर रहे हैं। यह नागरिक समूह अपनी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्थिरता को बनाये रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस प्रकार के नेता, जैसे महुआ मोइत्रा, जो अपने बयानों और नीतियों के ज़रिए संकट उत्पन्न कर रहे हैं, उनके लिए प्रतिदिन जोखिम और खतरा पैदा कर रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ का सर्व बंग समाज इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इन राजनीतिवादियों की कड़ी आलोचना करने के लिए एकजुट हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार से प्रगाढ़ अपील करता है कि जो FIR थाना में दर्ज की गई है, उस पर त्वरित और उचित कार्रवाई करते हुए महुआ मोइत्रा को गिरफ्तार करके न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। हम यह भी मांग करते हैं कि इस प्रकार की ओछी और विभाजनकारी राजनीति पर तुरंत रोक लगाई जाए, ताकि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।

छत्तीसगढ़ सर्व बंग समाज को यह गंभीर चिंता है कि देश में इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद, जो घटनाएँ घटी थीं, उनके समान एक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना का निर्माण हो सकता है, जिसमें विशेष रूप से सिख समुदाय के खिलाफ भड़की हिंसा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे संभावित षड्यंत्रों और बहकावों से पूरे देश में बांग्लाभाषियों के खिलाफ हिंसा भड़कने की आशंका है, जो समाज में अस्थिरता और तनाव को जन्म दे सकती है। इस गंभीर परिस्थिति के मद्देनज़र, आज हम आपके समक्ष उपस्थित हुए हैं, ताकि हम इस मुद्दे पर अपने विचार और चिंता व्यक्त कर सकें।

हम आप सभी के माध्यम से यह माँग करने आए हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो प्रायः विभिन्न मंचों पर स्वयं को बंग समाज की हितैषी बताती हैं, उन्हें चाहिए कि वे अपने सांसद को स्वयं संसद से वापस बुलाएँ। यह कदम न केवल बंग समाज के सदस्यों के प्रति एक सकारात्मक संकेत होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि पूरे भारतवर्ष में रह रहे शांतिप्रिय बांग्लाभाषियों को किसी भी प्रकार की अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। यदि ममता बनर्जी इस कार्य को स्वयं नहीं करती हैं, तो हम सभी को पुनः विचार करना होगा कि हमारे समुदाय की सुरक्षा और सम्मान कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है।

निश्चय ही, छत्तीसगढ़ स्थित सर्व बंग समाज अन्य प्रदेशों में निवासरत बंग भाइयों एवं बहनों के साथ मिलकर एक समर्पित एवं संगठित प्रयास के तहत लोकसभा अध्यक्ष तथा राष्ट्रपति से भेंट करके महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासन करने की दिशा में सहयोग की मांग करेगा। इस प्रक्रिया में सभी वर्गों के लोगों को एकजुट होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अपने विचारों को प्रभावी रूप से व्यक्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे कि एक मजबूत और सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा सके। इस महत्वपूर्ण विषय पर सामूहिक रूप से आवाज उठाना आवश्यक है ताकि उचित कार्रवाई हो सके।

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