अमृत टुडे /रायपुर, छत्तीसगढ़। गोवर्धन पूजा विशेष रूप से भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है जो दीपावली के बाद मनाया जाता है। इस पूजा का उद्देश्य भगवान कृष्ण की कृपा को स्मरण करना है, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाकर अपने भक्तों की रक्षा की थी।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय एकता और साझा संस्कृति को भी दर्शाता है।
इस दिन,
लोग घरों में गोबर से बनाए गए गोवर्धन की पूजा करते हैं और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनाते हैं।
देवी-देवताओं की आराधना के साथ ही, यह अवसर समुदाय के साथ जुड़ने और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण समय होता है।
राज्य सरकार ने इस विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे गोवर्धन पूजा को एक समान धार्मिक भाव से मनाएं और अपने आस-पास के लोगों के साथ मिलकर इस पर्व का उत्सव मनाएं। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस पर्व के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए, जिससे युवा पीढ़ी को इस अद्भुत पर्व के महत्व और इसकी परंपरा का ज्ञान हो सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस पूजा में स्थानीय मिट्टी और संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग करें ताकि हमारे पर्यावरण की रक्षा हो सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिले। इस पर्व के माध्यम से हम न केवल भगवान कृष्ण की भक्ति करते हैं, बल्कि अपने समाज को भी एकजुट करते हैं।
इस धार्मिक पर्व के साथ, सभी छत्तीसगढ़वासियों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है, ताकि हम सब मिलकर एक सशक्त और समृद्ध राज्य का निर्माण कर सकें। गोवर्धन पूजा के इस विशेष अवसर पर, आइए हम सभी मिलकर एक नई शुरुआत करें और अपने समाज को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
