झांकी‑प्रतियोगिताओं, निबंध‑भाषण‑चित्रकला सहित कार्यक्रमों से बच्चों का उत्साह बढ़ा
योजनाओं की जानकारी दी गई: बेटी बचाओ‑बेटी पढ़ाओ, सखी‑निवास, महतारी वंदन तथा बाल संरक्षण‑केन्द्र
धमतरी, अमृत टुडे। “आज के दिन हम अपनी बेटियों को यह संदेश देते हैं कि उनका भविष्य उज्ज्वल है, उन्हें शिक्षा‑व अधिकारों के साथ समाज में सशक्त बनना है” — जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का

धमतरी जिले के विभिन्न स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों में बुधवार को कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में “बाल दिवस” बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस विशेष आयोजन के तहत कार्यक्रम का आयोजन कुरूद ब्लाक के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल कोसमर्रा में किया गया, जहां “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत बाल दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का ने इस अवसर पर बताया कि इस कार्यक्रम में स्कूल के सभी बालक और बालिकाओं ने भाग लिया, जहाँ बच्चों ने “मैं भविष्य में क्या बनना चाहती हूं” और “परिवार में बेटियों के अधिकार” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निबंध, भाषण, और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचारों का अभिवादन किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत, बच्चों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जो कि उनके हुनर और रचनात्मकता को उजागर करने का एक बहुत अच्छा अवसर था। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार वितरण किया गया, जिससे उन्हें अपनी मेहनत और कोशिशों का सम्मान मिला।
जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का और महिला एवं बाल विकास अधिकारी महेश मरकाम ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाएं जैसे “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,” “सखी निवास,” “शक्ति सदन,” “सखी वन स्टॉप सेंटर,” “महिला हेल्पलाइन 181,” “घरेलू हिंसा,” “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना,” “महतारी वंदन योजना,” “सक्षम योजना,” “नोनी सुरक्षा योजना,” “पॉस्को ऐक्ट,” बच्चों के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य, बाल विवाह, और चाइल्ड हेल्प लाइन जैसी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

उक्त कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण केन्द्र से जेंडर विशेषज्ञ प्रियंका गंजीर, मिशन वात्सल्य से बाल संरक्षण अधिकारी यशवंत बैस, चाइल्ड लाइन से केस वर्कर भूपेंद्र सिन्हा, स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक भी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसका उद्देश्य न केवल बालकों की प्रतिभाओं को पहचानना, बल्कि उन्हें ज्ञान और जागरूकता प्रदान करना भी था, जिससे वे अपनी और अन्य बेटियों के भविष्य को सुनहरे तरीके से आकार देने में सक्षम हो सकें।




