वेंडर लाइसेंस का नियम नया नहीं बल्कि पहले से था; का लक्ष्य व्यापार नियंत्रित करना है, बोझ नहीं बढ़ाना।
रायपुर, अमृत टुडे। “जब किसानों को समय पर वादा‑अनुसार बोनस नहीं मिला और कटौती हुई, तो किस मुंह से विपक्ष उनकी बात करे?” — अरुण साव का बयान।
धान खरीद की प्रक्रिया के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा किए गए बयान पर अरुण साव ने एक प्रभावशाली पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जो ठगने, लूटने और धन वसूलने में शामिल है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद और झूठे हैं। अरुण साव ने यह भी व्यक्त किया कि उनकी सरकार किसानों के हित में काम कर रही है और सभी वादों को पूर्ण कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के नेता किस मुंह से किसानों की समस्याओं का उल्लेख कर सकते हैं, जबकि वे खुद दो साल के बोनस का वादा करके भी उसे 5 वर्षों तक पूरा नहीं कर सके। किस्तों में धन जारी करने के दौरान भी उन्होंने कटौती की, जिससे यह साफ होता है कि उनकी मंशा स्पष्ट रूप से संदिग्ध थी। अरुण साव ने विश्वास दिलाया कि धान खरीद का कार्य निर्धारित तिथि पर और पूरी सुचारूता के साथ संपन्न होगा।

इसके अलावा, ठेला-गुमटी कर वसूली और वेंडर लाइसेंस के संबंध में उन्होंने कहा कि वेंडर लाइसेंस का प्रावधान पहले से ही मौजूद है, यह एक नया नियम नहीं है। यह स्पष्ट किया गया कि नगर निकाय के भीतर किस व्यवसाय का संचालन हो रहा है, इसकी जानकारी रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यवसाय पर अनावश्यक बोझ डालना नहीं है, बल्कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न व्यवसायों का सुचारू और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है। इस प्रकार, उनका लक्ष्य एक ऐसा वातावरण बनाना है जो नियामक अनुपालन सुनिश्चित करते हुए व्यवसाय के विकास को बढ़ावा दे।



