कांग्रेस भवन में एससी विभाग द्वारा संविधान दिवस समारोह — अंबेडकर की चिंताएं आज भी प्रासंगिक
रायपुर, 27 नवंबर 2025
अमृत टुडे। आज रायपुर की राजधानी रायपुर स्थित कांग्रेस भवन में एससी विभाग की ओर से संविधान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा के समक्ष व्यक्त की गई तीन महत्वपूर्ण चिंताओं पर चर्चा की गई।
अंबेडकर ने चेताया था कि—
पहली, जिस दिन भारत में धर्म देश से ऊपर हो जाएगा, आज़ादी खतरे में पड़ जाएगी।
दूसरी, जब लोग नेताओं की अंधभक्ति में अपने ही अधिकारों को खो देंगे, तब लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।
और तीसरी, जब जनता अराजकता की राह पकड़ेगी, उस दिन राष्ट्र अपनी आज़ादी और अधिकार दोनों गंवा देगा।
आज, रायपुर की राजधानी रायपुर के अंतर्गत स्थित इस कांग्रेस भवन में, हमने एस.सी. विभाग की ओर से संविधान दिवस का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसमें हमने दो प्रमुख बिंदुओं पर गहराई से चर्चा की।
पहला बिंदु यह था कि, जब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को भारत की जनता के समक्ष प्रस्तुत किया था, तब उन्होंने 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में एक महत्वपूर्ण भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने संविधान के भविष्य और देश के नागरिकों के भविष्य के संदर्भ में तीन मुख्य चिंताओं का उल्लेख किया था।
डॉक्टर अंबेडकर की पहली चिंता यह थी कि जिस दिन भारत के लोग धर्म को अपने देश से अधिक महत्वपूर्ण मानेंगे, उस दिन भारतीय स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी। यह विचारशीलता इस बात को उजागर करती है कि एक धर्म और राजनीतिक सत्ता के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है।
उनकी दूसरी चिंता यह थी कि यदि भारत के लोग अपने नेताओं के प्रति अंधभक्ति में इस प्रकार निरंतर बढ़ते जाएंगे कि वे अपने अधिकारों के हनन को भी देखने के बावजूद अंधभक्ति को बनाए रखें, तो उस दिन भारत के लोग अपनी स्वतंत्रता और अधिकार दोनों को खो देंगे। यह चेतावनी एक बहुत गहरा संदर्भ प्रदान करती है कि प्रति व्यक्ति की जिम्मेदारी और जागरूकता कितनी मायने रखती है।
अन्त में, तीसरी चिंता जो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने व्यक्त की थी, वह यह थी कि जब भारत के लोग अराजकता की ओर बढ़ेंगे, तो उस स्थिति में भी वे अपनी स्वतंत्रता और अधिकार को खो देंगे। यह चेतावनी हमारे समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्थिरता और अनुशासन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, आज के इस कार्यक्रम में इन चिंताओं पर चर्चा करते हुए, हमने ना केवल अतीत की बात की, बल्कि भविष्य के लिए भी एक दिशा निर्धारित करने का प्रयास किया।





