अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़ 15 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने प्रेस वार्ता में अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने, बच्चों के बचाव ऑपरेशन और बाल संरक्षण के लिए ‘रक्षक’ विशेष डिप्लोमा कोर्स की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वनांचलों में जागरूकता की कमी के बावजूद अब सूचना मिलने के मात्र 1 घंटे के भीतर बच्चों को सुरक्षित किया जा रहा है और भविष्य का लक्ष्य 1 मिनट के भीतर सुरक्षित बनाना है।
विवरण:: वर्णिका शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर सुदूर वनांचलों, जनजातीय और कुछ मैदानी इलाकों में बाल विवाह की प्रवृत्ति अभी भी जारी है, लेकिन आयोग इसे रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि वनांचलों में बाल विवाह के कानूनी और अपराधिक पहलू को लेकर जागरूकता बहुत कम है, जिसे देखते हुए आयोग ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की और उसमें डीसीपीओ, डीपीओ और अन्य अधिकारियों के साथ यह रणनीति तय की कि किस‑किस स्तर पर ‘मुनादी’ (घोषणा) और प्रचार‑प्रसार किया जाए, ताकि संदेश हर घर‑घर पहुँचे।
उन्होंने जोर दिया कि वनांचलों में यह जागरूकता अभियान स्थानीय भाषा में होना चाहिए और वीडियो व ऑडियो‑विज़ुअल (AV) माध्यम के जरिए मैसेज देना जरूरी है, ताकि कम साक्षर समाज भी बाल विवाह के गंभीरता को समझ सके। अगर अक्षय तृतीया के दिन ही मुनादी की योजना है, तो उससे पहले भी 3–4 बार इस प्रक्रिया को दोहराना चाहिए, ताकि यह संदेश लगातार दिमाग में बैठे और लोग बाल विवाह को “सामान्य रिवाज” न समझें।
बाल संरक्षण के क्षेत्र में पेशेवर युवाओं का नेटवर्क बनाने के लिए आयोग ने एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम ‘रक्षक’ शुरू किया है। यह एक एक‑वर्षीय डिप्लोमा कोर्स (पोस्ट‑ग्रेजुएट डिप्लोमा) है, जिसे आयोग की अनुशंसा पर राज्य शैक्षणिक परिषद ने तैयार किया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के 6 प्रमुख राज्य विश्वविद्यालयों के साथ दिसंबर में MOU (समझौता ज्ञापन) साइन किया गया है, जिससे यह कोर्स राज्य भर में उपलब्ध होगा। किसी भी विषय से स्नातक (Graduate) डिग्री रखने वाला युवा इसमें प्रवेश ले सकता है, ताकि वह बाल अधिकार और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक दक्ष पेशेवर बन सके। इस कोर्स का उद्देश्य यह है कि युवा बाल संरक्षण विभाग, आयोग या गैर‑सरकारी संस्थाओं में रोल मॉडल और बाल‑केंद्रित तंत्र बन सकें।
बच्चों के बचाव कार्य पर उन्होंने बताया कि आयोग ने एक विशेष समेकित टीम गठित की है, जिसने रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी और समन्वय बढ़ाया है। उन्होंने उदाहरण दिए कि सुदूर वनांचल इलाकों में भी बच्चे के असुरक्षित होने की सूचना मिलने पर मात्र 1 घंटे के भीतर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। उनका लक्ष्य यह है कि भविष्य में प्रशासन इतना सक्रिय हो कि सूचना मिलते ही 1 मिनट के भीतर ही बच्चा सुरक्षित हो जाए और कोई बच्चा बेसहारा या असुरक्षित महसूस न करे।
इन प्रयासों के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग राज्य में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाने और बाल अधिकारों की सुरक्षा को व्यवस्था के अंदर बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे बच्चों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिले, बल्कि राज्य में बाल‑केंद्रित, जागरूक और त्वरित प्रतिक्रिया वाली प्रशासनिक तंत्र तैयार हो।




