अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़ 15 अप्रैल 2026 । सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लगातार कलेक्टर अमृत विकास टोपनो और पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर से संपर्क कर आवश्यक दिशानिर्देश दिए हैं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
विवरण: घायलों के उपचार और रेस्क्यू अभियान:
घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज और अपेक्स अस्पताल में भेजा गया, जबकि गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों को रायपुर के कालड़ा अस्पताल में उन्नत चिकित्सा के लिए रेफर किया गया।

उपचार और आर्थिक सहायता की व्यवस्था:
कलेक्टर टोपनो ने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों के अनुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर कंपनी प्रबंधन से सहमति बनाई गई। घायलों को काउंसलिंग (मनोजागरूकता) सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मृतकों और परिजनों की सहायता:
घटना में कुल 36 श्रमिक प्रभावित, जिनमें 17 की मौत और 19 घायल हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को एम्बुलेंस के माध्यम से गृहग्राम तक पहुँचाने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की। प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष के तहत मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह‑सहायता भी स्वीकृत की गई है।
कंपनी प्रबंधन की सहायता और मजिस्ट्रियल जांच:
कंपनी प्रबंधन ने कहा कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूर्ण रूप से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसके तहत जांच टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी शामिल है।
मृतकों के नाम और पृष्ठभूमि
हादसे में 17 मजदूरों की मृत्यु हुई, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 और उत्तर प्रदेश के 2 श्रमिक शामिल हैं।
मुख्य नामों में:
रितेश कुमार (बिहार),
अमृत लाल पटेल, थंडा राम लहरे, उधव सिंह यादव, रामेश्वर महिलांगे, नदीम अंसारी (छत्तीसगढ़),
तरुण कुमार ओझा, अशोक परहिया, अब्दुल करीम (झारखंड),
सुसांत जना, मनस गिरी, शेख सैफुद्दीन, कार्तिक महतो, शिबनाथ मुर्मू (पश्चिम बंगाल),
पप्पू कुमार, बृजेश कुमार (उत्तर प्रदेश) आदि शामिल हैं।




