• Wed. Apr 15th, 2026

“यूसीसी आदिवासियों के हितों पर डकैती, बस्तर की जमीनों पर उद्योगपतियों की नजर” – कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला

Spread the love

अमृत टुडे,रायपुर छत्तीसगढ़ 15 अप्रैल 2026 /छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि साय कैबिनेट द्वारा यूसीसी (Uniform Civil Code) लागू करने के लिए कमेटी गठित करने के फैसले से आदिवासी समुदाय को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कवायद आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार और पारंपरिक संरचनाओं को “डकैती” के जैसा है, और इससे उद्योगपतियों को बस्तर और अन्य आदिवासी क्षेत्रों की जमीन पर कब्जा हासिल करने में आसानी होगी।

विवरण: आदिवासियों का संवैधानिक बल और यूसीसी का खतरा:
शुक्ला ने बताया कि छत्तीसगढ़ की लगभग 32% आबादी आदिवासियों की है, जिन्हें संविधान में विशेष अधिकार प्राप्त हैं। उनके हितों की सुरक्षा के लिए पंचायत उपबंध (पेसा, PESA) अधिनियम और पाँचवीं अनुसूची जैसे प्रावधान लागू हैं, जो ग्राम सभाओं को भूमि, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण व निर्णय‑लेने का अधिकार देते हैं। उनका कहना है कि यूसीसी के नाम पर इन संरचनाओं को कमजोर किया जाएगा, जिससे आदिवासियों की खुद‑शासन व परंपरागत विवाह‑उत्तराधिकार प्रणाली पर सीधा हमला होगा।

“डकैती” और उद्योगपतियों की नजर बस्तर पर:
सुशील शुक्ला ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार की यह नीयत आदिवासियों के हितों में डकैती डालने की है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्ति की चर्चाओं के बीच भाजपा‑समर्थित उद्योगपति आदिवासी बारही जमीनों पर नजर गड़ाए हुए हैं, ताकि खनिज, स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और बड़ी परियोजनाओं के नाम पर भूमि पर कब्जा हो सके। उन्होंने कहा कि यूसीसी की कवायद भी ऐसी ही एक रणनीति है, जिससे आदिवासी समुदाय के सामाजिक‑कानूनी ढांचे को कमजोर कर पूँजी‑हितों को आगे रखा जाएगा।

यूसीसी लागू करना अनुचित और विरोधी:
उन्होंने यह भी जोड़ा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आदिवासी‑केंद्रित और सामाजिक स्थिति को देखते हुए यहाँ यूसीसी लागू करना अनुचित, अन्यायपूर्ण और संवैधानिक संतुलन को तोड़ने वाला होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी की कवायद को आदिवासी समुदाय की आवाज को दबाने और उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने की राजनीतिक कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए और इसके खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

amrittoday.in

Leave a Reply

You Missed