मोबाइल मेडिकल यूनिट, मितानिन और घर‑घर जांच से सुदूर वनांचल में तक पहुंच; 2030 तक मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ का राज्य व राष्ट्रीय लक्ष्य
अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़ 25 अप्रैल 2026 । विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में मलेरिया के मामलों में आश्चर्यजनक गिरावट और जांच‑उपचार‑जागरूकता के समन्वित अभियानों से बन रही नई तस्वीर सामने आती है। 2015 में 1.4 लाख से अधिक मामलों के बाद 2025 में यह संख्या 28,836 पर आ गई है, जिससे राज्य की मलेरिया उन्मूलन योजना को मजबूती मिली है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य 2030 तक छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त प्रदेश बनाना है, जिसके लिए सरकार‑स्वास्थ्य अमला‑आम जनता के बीच सामूहिक भागीदारी बढ़ाई जा रही है।

विवरण: मलेरिया, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए जीवन‑घातक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ बसाहटों के कारण यह लंबे समय तक एक बड़ी चुनौती बना रहा।
हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 में कुल 1,44,886 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 28,836 तक घट चुकी है, यानी लगभग 80 प्रतिशत से अधिक गिरावट।
इस परिवर्तन के पीछे सुनियोजित रणनीति, समयबद्ध जांच, निःशुल्क उपचार और सक्रिय जागरूकता अभियान जैसे कारक हैं।
राज्य में “मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़” और “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें स्वास्थ्य दल व मितानिन घर‑घर पहुंचकर तत्काल जांच कर रही हैं और पॉजिटिव मरीजों को तुरंत दवाई दे रहे हैं।
मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी सुदूर वनांचल में भी जांच, उपचार और बचाव के लिए जनजागरूकता का काम कर रहे हैं।
व्यक्तिगत स्तर पर मच्छरदानी का उपयोग, आसपास की साफ‑सफाई, पानी के ठहराव को रोकना और बुखार आने पर तुरंत जांच कराना इस बीमारी को रोकने के सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।
राज्य और केंद्र सरकार दोनों का लक्ष्य 2030 तक भारत व छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त बनाना है, जिसके लिए विश्व मलेरिया दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सक्रिय भागीदारी और सजगता बरतने की अपील की है।




