अमृत टुडे, जशपुर छत्तीसगढ़
09 अगस्त 2026 । जशपुर की बांस कारीगर महिलाएं अपनी कला से आत्मनिर्भर बन रही हैं; मुख्यमंत्री के समर्थन में जशक्राफ्ट के उत्पाद प्रमुख हवाईअड्डों पर बिक रहे हैं और स्थानीय हुनर को देशव्यापी पहचान मिल रही है। यह पहल समावेशी विकास और ग्रामीण आजीविका के नए रास्ते खोल रही है।
विवरण :: जशपुर के ग्रामिण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक रूप देकर नयी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जशक्राफ्ट के सहयोग से तैयार उत्पाद अब देश के प्रमुख हवाईअड्डों तक पहुँच रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय बाजार का अवसर मिल रहा है। इससे ना केवल आय के स्रोत बढ़े हैं, बल्कि काम सीखने और आत्मनिर्भर बनने के मार्ग भी खुले हैं।

बांस की टोकरी, सजावटी वस्तुएँ और उपयोगी घरेलू सामान की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला है। महिलाओं ने सामूहिक उद्यम बनाकर उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और समाज में महिलाओं की प्रतिष्ठा बढ़ी है। यह प्रयास समेकित विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण का उदाहरण बन गया है।




