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रायपुर, 17 नवम्बर 2024

अमृत टुडे। किसी व्यक्ति,की छवि को खराब करने के लिए (सोशल मीडिया के माध्यम ) इंटरनेट या डिजिटल माध्यम का उपयोग करके झूठी जानकारी फैलाना.
इसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मानहानि करना भी कहा जा सकता है।

साइबर मानहानि

सोशल मीडिया, ब्लॉग, ईमेल, या वेबसाइट के माध्यम से किसी के बारे में गलत तथ्य ,जानकारी झूठी अफवाह फैलाना।
इंटरनेट पर समाचार पत्र में किसी व्यक्ति के बारे में अपमानजनक, असत्य, या नकारात्मक सामग्री लिखना, पोस्ट करना।
किसी व्यक्ति के नाम या पहचान का उपयोग करके फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल बनाकर उसे बदनाम करना।
किसी व्यक्ति की छवि को बदनाम करने के लिए उसकी तस्वीरों को एडिट करना और उन्हें वायरल करना।
किसी पर झूठे आरोप लगाना ।

साइबर मानहानि से नुकसान

इससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान हो सकता है।
पीड़ित को मानसिक और भावनात्मक आघात का सामना करना पड़ता है।
यदि यह किसी कंपनी या व्यवसाय के खिलाफ होता है, तो इससे उनकी ब्रांड वैल्यू और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कानूनी प्रावधान

मानहानि का अपराध असंज्ञेय होता है अर्थात इसके लिए आपको सीधे न्यायालय में रिपोर्ट करना होता है पुलिस को इसमें सीधे एफ आई आर दर्ज करने और विवेचना करने का अधिकार नहीं होता है आईपीसी, धारा 499 और 500 मानहानि के अपराध पर 2 साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान था अब बीएनएस में यह धारा 356 हो गई है।

सावधान रहें,सुरक्षित रहें

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