सैटेलाइट और ड्रोन से ठूंठ व खेत तक दिखाए, जंगल घटकर 1 हेक्टेयर में सिर्फ 25–50 पेड़; पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव
अमृत टुडे, रायपुर छत्तीसगढ़ 25 अप्रैल 2026। उदंती‑सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर जोन में पिछले 15 वर्षों में लगभग 1 लाख पेड़ काटकर 106 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया, जिसका खुलासा इसरो की सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे से हुआ है।
वन विभाग ने जैतपुरी गांव के 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर बेदखली नोटिस जारी किए हैं और कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

विवरण: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इसरो की कार्टोसैट सैटेलाइट इमेजरी (2006, 2008, 2010, 2012, 2022) और ड्रोन सर्वे के आधार पर उदंती‑सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर वन्यजीव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण का खुलासा किया है।
डेटा से पता चला है कि 2011 में 45 हेक्टेयर पर अतिक्रमण अब बढ़कर लगभग 106 हेक्टेयर (लगभग 265 एकड़) हो चुका है, जहां लगभग 1 लाख पेड़ काट दिए गए।
ड्रोन की हाई‑रिज़ोल्यूशन तस्वीरों में हर खेत, कटे पेड़ और ठूंठ साफ तरीके से दिखाए गए हैं, जिससे अतिक्रमणकारियों की पहचान आसान हुई।
वन विभाग के अनुसार कई लोगों ने “गर्डलिंग” जैसी तकनीक से पेड़ सुखाकर जमीन खाली की और राजस्व भूमि होने के बावजूद वन भूमि पर कब्जा किया।
यह इलाका टाइगर रिज़र्व का कोर जोन और महानदी कैचमेंट एरिया भी है, यहां हाथी, बाघ और तेंदुआ जैसे प्रमुख वन्यप्राणियों का आवास है, जिस पर अतिक्रमण ने गंभीर पारिस्थितिकी प्रभाव डाला है।
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 वर्ष तक और लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 3 वर्ष तक सश्रम कारावास के साथ‑साथ अवैध रूप से बढ़ाई गई संपत्तियों को भी अटैच किया जा सकता है।
पिछले 3 वर्षों में रिज़र्व प्रबंधन ने लगभग 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाकर 600 से अधिक शिकारियों, तस्करों और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है, जिससे मानव‑वन्यप्राणी संघर्ष में कमी आई है।
बेदखली के बाद इन भूमियों पर भू‑जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएंगी और विशाल पैमाने पर वृक्षारोपण कर पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह संदेश दिया गया है कि पर्यावरण और वन संरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।




