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: *नई पंजीयन गाइडलाइन में त्रुटि: पंजीयन समस्या निवारण संस्था ने रायपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंप विरोध जताया*

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*”नई भूमि गाइडलाइन रेट्स व पंजीयन शुल्क में वृद्धि से आम लोगों को भारी मुश्किल — संस्था ने तुरंत निरस्तीकरण व सरकार से पुनर्विचार की मांग की”*

आज पंजीयन समस्या निवारण संस्था के सभी सदस्यों ने कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई नई भूमि गाइडलाइन रेट्स तथा पंजीयन व रजिस्ट्री नियमों की वजह से उत्पन्न हुई त्रुटियों व असमंजस के प्रति अपना विरोध प्रकट किया। उन्होंने मांग की है कि नई गाइडलाइन को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए, अन्यथा इससे आम खरीदारोंऔर ज़मीन कारोबारियों को भारी वित्तीय व कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

विवरण :: आज, पंजीयन समस्या निवारण संस्था द्वारा एक क्रमबद्ध और संगठित तरीके से लगातार राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आंदोलन के तहत, आज सभी सदस्यों ने रायपुर कलेक्टर महोदय को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने यह अवगत कराया कि भूमि के पंजीयन की नई गाइडलाइन में अत्यधिक त्रुटियाँ हैं। कलेक्टर से हमारी यह प्रमुख मांग है कि नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से विरोध स्वरूप यह मांग उठाई है कि यदि सरकार को भूमि दरें बढ़ाने की आवश्यकता थी, तो इसे किसी विशेषज्ञ या भूमि के जानकार के साथ समझदारी से किया जाना चाहिए था, ताकि आम जनता को इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की हानि या कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इसके अतिरिक्त,
सभी सदस्यों ने सरकार से समर्थन की भी मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई गाइडलाइन में निर्धारित दरें कई क्षेत्रों में मौजूदा बाजार दरों से भी अधिक हो गई हैं। परिणामी रूप से, नई दरों का खरीदारों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। शहरी क्षेत्रों में पंजीकरण शुल्क में 200-400 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि 50-400 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। विशेष रूप से, रायपुर के आसपास के गांवों में, जहां पहले एक हेक्टेयर भूमि पर 25 से 30 लाख का स्टांप शुल्क लगता था, अब यह बढ़कर 1 से 1.5 करोड़ तक पहुंच गया है।

इसी के साथ,
स्टांप शुल्क के अलावा पंजीयन शुल्क भी अलग से देना होगा, जिससे नागरिकों पर और भी वित्तीय बोझ बढ़ गया है। भूमि कारोबारियों का यह भी कहना है कि 7 नवंबर को रजिस्ट्री से संबंधित नियमों में किए गए संशोधनों में भी कई विसंगतियाँ थीं। अब, अचानक नई गाइडलाइन के परिवर्तन के कारण आम खरीदारों और पक्षकारों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार, वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हमें सरकार से यह अपेक्षा है कि वे इस समस्या का शीघ्र समाधान करें

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